16 साल पहले 17000 फीट की ऊंचाई पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले शहीद जवानों के माता-पिता को सरकार से शिकायत है। एक बात हमेशा सताती है कि साल के 364 दिन इन्हें कोई याद नहीं करता। बस एक दिन समारोह होता है। उनके बेटे की शहादत के दिन। उस दिन उन्हें आमंत्रित किया जाता है। फूलों की मालाएं पहना दी जाती हैं। भाषण होते हैं और फिर सालभर वह गुमनाम हो जाते हैं। न उन शहीदों की कुर्बानी याद करने का समय रहता है और न ही उनके माता-पिता की कुशलक्षेम पूछने का।
ऐसी अनदेखी से जी दुखता है
कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए मेजर संदीप सागर के पिता हरबंसलाल सागर ने कहा कि अपने बेटे की कुर्बानी के बदले कुछ नहीं चाहिए, लेकिन ऐसी अनदेखी से जी दुखता है। सरकार को चाहिए कि शहीदों के परिजनों का ध्यान रखे, ताकि देश की रक्षा के लिए अपने बेटों को भेजने में कोई संकोच न करे।
हरबंसलाल ने बताया कि कश्मीर में राजौरी के नौसेरा में ऑपरेशन विजय के दौरान उनका बेटा शहीद हुआ था। इसके बाद उन्होंने अपनी बहू की दूसरी शादी कर दी, जिनकी एक बेटी भी है। उन्होंने कहा कि शहीदों के अभिभावकों को एक्स ग्रेसिया की तरह कुछ मदद मिलनी चाहिए।
वहीं, शहीद संदीप शांकला के पिता जेएस कंवर का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा हे। फौज से ही ले.कर्नल के पद से रिटायर जेएस कंवर ने कहा कि उनकी या पत्नी की तबियत खराब होती है तो पड़ोसियों के अलावा किसी का साथ नहीं होता। कंवर के अनुसार, सरकार को शहीदों के परिजनों का ध्यान रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।
ब्रिगेडियर किरन बोले, बुलंद इरादों ने दिलाई जीत
जंग में लड़ते हुए देश के लिए शहीद होने वालों को विजय दिवस के मौके पर फिर सलाम किया जाएगा। इंडियन एक्स सर्विसमैन लीग कन्वीनर के रिटायर्ड ब्रिगेडियर किरन कृष्ण ने कहा कि 10-12 हजार फुट की ऊंचाई पर कारगिल युद्ध के दौरान जवानों ने जोश और जज्बे का परिचय देकर दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए।
ऑपरेशन विजय के दौरान जवानों ने 135 किलोमीटर के दायरे में चोटियों से नीचे लगातार हमले किए। भारत-पाकिस्तान के बीच फरवरी, 1999 को लाहौर डेक्लरेशन हुआ, लेकिन दुश्मन देश ने इसका उल्लंघन करते हुए युद्ध की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि फौज में नई तकनीक और नए हथियारों को भी नियमित अंतराल पर शामिल किया जाना चाहिए, ताकि जवानों का मनोबल हमेशा बना रहे।
याद रखनी होगी लड़ाई से मिली सीख
ऑपरेशन विजय के 16 वर्ष पूरे होने पर शहीदों को याद किया जाएगा, लेकिन इस लड़ाई से जो सीख मिली है, उसे देश की रक्षा के लिए हर वक्त याद रखना होगा। शहीदों के परिवारों को पूरा सम्मान दिया जाना चाहिए। उनके साथ सामाजिक सरोकार भी बढ़ाए जाने चाहिए। यह बात पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने कही।
उनका कहना है कि सीमाओं पर देश की रक्षा में जुटे जवानों और अधिकारियों ने सराहनीय कार्य किए, अब भी उनके हौसले बुलंद हैं, लेकिन हर वक्त अलर्ट रहने के साथ इंटेलिजेंस को भी और तवज्जो देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वक्त के साथ सर्विलांस के तरीकों में काफी बदलाव आए हैं, जिसका फायदा मिलने लगा है।
सर्विलांस के मद्देनजर राडार, नाइट विजन इंक्विपेंट्स, हेलीकॉप्टर सहति कई उपकरणों और प्रणाली को रक्षा सेवाओं में शामिल किया गया है, लेकिन आगे भी तकनीक के साथ इनमें बदलाव जारी रखना होगा।