कारगिल युद्ध में 13 जैक राइफल यूनिट के लांस नायक हरीश पाल शर्मा शहीद हो गए थे, लेकिन उनके परिवार के लिए 'विजय दिवस' का कोई मतलब नहीं हैं। क्योंकि उन्हें एक ऐसा जख्म मिला है, जिससे उभर पाना उनके लिए मुश्किल है। पंजाब के पठानकोट जिला निवासी शहीद हरीश की मां राज दुलारी की आंखें हर साल विजय दिवस पर छलक उठती हैं।
उनका कहना है कि बेशक सरकार कारगिल युद्ध की जीत के 20 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है, मगर इस जश्न के पीछे घना अंधेरा छाया है। इसमें सिसकियां शामिल हैं, उन परिवारों की जिन्होंने उस युद्ध में अपने जिगर के टुकड़ों को कुर्बान कर दिया तथा अब सरकारों की उपेक्षा के चलते वह गुमनामी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।