गर्मियां शुरू हो चुकी हैं, साथ ही पड़ने लगी है तपती-चुभती धूम। ऐसे में घर लौट कर आएं और कुछ ठंडा पीने का मन हो तो कांजी वड़ा एक अच्छा विकल्प है। यह एक स्वादिष्ट पेय पदार्थ है।
प्यास तो मिटती ही है इससे, खाना पचाने का भी यह एक अच्छा तरीका है। डेली रुटीन में पीने के लिए हो या त्योहार के लिए, कांजी बनाई जा सकती है और इसका मजा लिया जा सकता है। अब ये कांजी बनती कैसे है, आइए जानते हैं-
कांजी बनाने के लिए ये सब चाहिए-
पानी - 2 लीटर (10 गिलास)
हींग - 2 -3 पिंच
हल्दी पाउडर- 1 छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/4-1/2 छोटी चम्मच
पीली सरसों - 2 छोटी चम्मच
सादा नमक - 1 छोटी चम्मच (स्वादानुसार)
काला नमक - 1 छोटी चम्मच (यदि आप चाहें)
सरसों का तेल - 1-2 टेबिल स्पून
बड़े बनाने के लिए ये सब चाहिए-
मूंग की दाल - 100 ग्राम (एक छोटी कटोरी)
नमक - स्वादानुसार (1/4 छोटी चम्मच)
तेल तलने के लिये
ऐसे बनाएंगे कांजी-
पानी को किसी बर्तन में डालकर उबाल आने तक गरम कीजिए। अब पानी को ठंडा कीजिए और कांच या प्लास्टिक के किसी कन्टेनर में डाल लिजिए। अब इस पानी में हींग, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, पीली सरसों, सरसों का तेल और दोनों प्रकार के नमक डाल कर अच्छे से मिला लिजिए।
अब कंटेनर का ढक्कन बंद करके इसे 3 दिन के लिए रख दीजिए। ध्यान रहे, इस मिश्रण को रोजाना एक बार चम्मच से अच्छे से जरूर मिलाना है। तीसरे दिन कांजी का स्वाद टेस्ट कीजिए। कांजी हल्की-हल्की खट्टी हो जाएगी। आप चाहें तो इसे भी पी सकते हैं। चौथे दिन इसका स्वाद और खट्टा और टेस्टी हो जाएगा। अब कांजी तैयार है।
अब बनाते हैं बड़े-
दाल को साफ करके अच्छे से धो लें और दो घंटे के लिए भिगोकर रख दें। दो घंटे को बाद दाल को पानी से निकाल कर हल्की दरदरी पीस लें। अब पिसी हुई दाल को बर्तन में निकाल कर अच्छी तरह स्पंजी होने तक फैट लें। अब कढ़ाई में तेल गरम कीजिए। हाथ से छोटी-छोटी बड़ियां बनाइए और तल लिजिए।
फूल कर गोल हो जाने पर इन्हें पलट-पलट कर हल्का भूरा होने तक तलें। इस तरह सारी बड़ियां तल लें और एक प्लेट में निकाल लें। अब बड़ियों को गुनगुने पानी में 15 मिनट के लिए भिगो कर रख दें और फिर निकाल कर हाथ से हल्का-सा दबा अतिरिक्त पानी निकाल कर रख लें। अब कांजी को गिलास में डालिए, ऊपर से बड़िया डालें और प्यास बुझाइए।
-अगर बड़ियां नहीं बना सकते हैं तो रायते वाली बूंदी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
-अगर पीली सरसों उपलब्ध नहीं है तो काली सरसों या राई का प्रयोग कर सकते हैं।