कोर्ट में दोबारा गवाही के दौरान बूटी राम ने रामकुमार चौधरी और ज्योति के बीच रिश्ते के बारे में बताया। साथ ही अपनी बेटी की शादी में खींची गई फोटो में रामकुमार चौधरी की पहचान की और कोर्ट में खड़े चौधरी को भी पहचाना। इससे केस में एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि हिमाचल के दून के आरोपी विधायक रामकुमार चौधरी की ओर से लगातार धमकी मिलने के बाद बूटी राम ने चौधरी को पहचानने और ज्योति से किसी तरह के रिश्ते से इनकार कर चुके थे।
रामकुमार चौधरी और ज्योति के संबंधो की जानकारी दी
बूटी राम ने इस बार की गवाही में सीआरपीसी 161 के तहत दर्ज बयान दोहराए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनकी छोटी बेटी ने रामकुमार चौधरी और ज्योति के बारे में बताया था कि इनके बीच कैसे संबंध हैं और ज्योति शादी करना चाहती है। बाद में पता चला कि रामकुमार चौधरी उससे शादी नहीं करना चाहते। वहीं, बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा कि 2006 में बूटी राम के बेटे की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक वह हादसा था, लेकिन बूटी राम उसे हत्या बता रहे थे। बूटी राम ने हाईकोर्ट के आदेश पर हत्या का मामला दर्ज कराया, लेकिन हत्या का कोई सबूत नहीं मिला। बाद में केस को खारिज हो गया।
कोर्ट में कथित ब्वायफ्रेंड ने दिया यह बयान
केस में गवाही देने के लिए ज्योति का ब्वायफ्रेंड सुमित उर्फ सिमी (जिसका पुलिस की चार्जशीट में जिक्र है) भी आया। उसने कहा कि ज्योति से सिर्फ बातचीत होती थी, लेकिन जब पता चला कि उसका किसी और के साथ संबंध है तो उसने बातचीत बंद कर दी। खास बात यह है कि बचाव पक्ष ने सिमी को ज्योति का कजन साबित कर दिया। इसके बाद सिमी खुद ही उलझ गया। वहीं, बचाव पक्ष ने बूटी राम पर भी ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए। कोर्ट में गवाही होने के बाद सिमी और बूटी राम चुपके से कोर्ट से निकल गए।
'ब्वायफ्रेंड' को इस तरह साबित किया कजन
सिमी ने कोर्ट में कहा कि उसकी सिर्फ ज्योति से नार्मल बातचीत होती थी। जब उसे पता चला कि उसका किसी से संबंध है तो बातचीत बंद कर दी। अब सिमी के बयान में खास बात यह है कि उसने कोर्ट में यह नहीं कहा कि वह रामकुमार चौधरी के साथ संबंध में थी। वहीं, बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा कि सिमी की बुआ का नाम आशा रानी है। आशा रानी का पति यशपाल है और यशपाल बूटी राम का ममेरा भाई है। तो इस तरह से सिमी व ज्योति के बीच भाई-बहन का रिश्ता है। वहीं, पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक सिमी ज्योति का ब्वायफ्रेंड था।
ज्योति के फोन से यह मिला था रिकॉर्ड
चार्जशीट के मुताबिक, ज्योति की हत्या के बाद उसका फोन घग्गर नदी में फेंक दिया गया था, लेकिन फोन का डाटा लैब से रिट्राइव कराया गया था। यह रिपोर्ट पुलिस गत वर्ष सितंबर माह में कोर्ट में दायर भी कर चुकी है। रिट्राइव हुए डाटा में पता चला था कि 11 नवंबर 2012 से लेकर 22 नवंबर 2012 तक 44 मिस्ड कॉल चौधरी की तरफ से ज्योति के नंबर पर दी गई। इस दौरान 13 नवंबर को हैप्पी दिवाली का एसएमएस भी चौधरी के नंबर से ज्योति के नंबर पर आया है। कुल 146 एसएमएस भी डाटा में वापस मिले थे, जिनमें ज्यादातर जालंधर निवासी सिमी के नंबर से आए थे। सिमी की तरफ से आए ज्यादातर एसएमएस में गुहार लगाई गई कि वह किसी और के लिए उसे छोड़कर न जाए।
इसलिए आई दोबारा गवाही की नौबत
अपनी बेटी ज्योति के लिए इंसाफ मांग रहे बूटी राम को पूरे परिवार को खत्म करने की बार-बार मिल रही धमकियों ने अदालत में बयान से मुकरने के लिए मजबूर कर दिया। उन्हें पेशी से एक दिन पहले 22 दिसंबर को मनीमाजरा से अपने घर पर बुलाकर और 23 दिसंबर को पंचकूला की अदालत में पेश होने से चंद घंटे पहले मोहाली में हथियारों से लैस कार सवार चार लोगों ने विधायक रामकुमार के खिलाफ बयान नहीं देने की धमकियां दीं। इससे वह इतने टूट गए कि ज्योति हत्याकांड में शिकायतकर्ता होने के बावजूद वह बयानों से पलट गए।
यह था ज्योति की हत्या का मामला
21-22 नवंबर 2012 में ज्योति की हत्या के बाद उसका शव सेक्टर-21 में फेंक दिया गया था। बूटी राम की शिकायत पर 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-पांच थाने में विधायक सहित 12 लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आठ जनवरी 2013 को विधायक रामकुमार ने कोर्ट में सरेंडर किया था। बूटी राम के वकील जितेन्द्र सहरावत ने बताया कि चूंकि विधायक से जुड़ा यह मामला है। उनके राजनीतिक प्रभाव में आकर कुछ लोगों ने शिकायतकर्ता को धमकियां दी हैं, जिनके खिलाफ शिकायत दी गई।