बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में बुधवार को अदालत में तीन लोगों के बयान हुए। इस दौरान सेंट्रल फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के निदेशक डीपी गंगवार ने ज्योति के मोबाइल से डाटा मिलने की पुष्टि की।
वहीं, एसआई बलवान सिंह ने ट्रक की पहचान की और कांस्टेबल रविन्द्र ने ज्योति के सैमसंग मोबाइल को सीएफएलएल में जमा कराने की बात स्वीकार की।
इस कार्यवाही के दौरान हिमाचल के दून के विधायक रामकुमार चौधरी भी मौजूद रहे।
आरोप पत्र के मुताबिक, चौधरी ने हत्या के बाद ज्योति का मोबाइल घग्गर में फेंक दिया था। पुलिस ने झुग्गी बस्ती में रहने वाले से यह फोन बरामद किया था। उसके फोन से सभी डाटा भी नष्ट कर दिए गए थे।
पुलिस ने इसे लैब भेजकर डाटा रिकवर करवाया और इससे प्राप्त एसएमएस व फोटो को सप्लिमेंट्री चार्जशीट का हिस्सा बनाया था।
ज्योति का दोस्त सिमी भी बना था गवाह
सीएफएसएल से ज्योति के फोन से मिले एसएमएस के आधार पर पुलिस ने ज्योति के दोस्त जालंधर निवासी सिमी को गवाह बनाया था।
सिमी ने कहा था कि 2011 में ज्योति के साथ उसके संबंध थे, लेकिन जब उसे पता चला कि वह कांग्रेस के राजनेता रामकुमार चौधरी के साथ संपर्क में आ गई तो उनके बीच झगड़ा भी हुआ।
इसके बाद उसने ज्योति से मिलने-जुलने और बातचीत का सिलसिला खत्म कर दिया।
ज्योति के फोन से मिले थे रामकुमार की तस्वीर
ज्योति के फोन के मिले डाटा में रामकुमार चौधरी, उनकी पत्नी और बेटे की तस्वीरें भी थीं, जो जन्मदिन की पार्टी में कैमरे में कैद किया गया था।
सीएफएसएल के निदेशक ने अदालत में दिए बयान में कहा कि मोबाइल से डाटा नष्ट कर दिया गया था, जिसे बाद में रिकवर कर लिया गया।