चंडीगढ़। दो लाख रुपये की रिश्वत मामले में गवाह और एनडीपीएस मामले में आरोपी समदर्श उर्फ जोसेफ की जमानत याचिका पर बुधवार को अंतिम बहस हुई। जोसेफ के वकील यादविंदर संधू ने तर्क देते हुए कहा कि उनके मुवक्कील पर झूठा मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि वह चंडीगढ़ पुलिसकर्मियों से जुड़े रिश्वत मामले में गवाह है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्कील पर पहले शिकायत वापस लेने के लिए पुलिसकर्मियों ने दबाव डाला। शिकायत वापस न लेने पर उनके खिलाफ एनडीपीएस का झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। वकील ने कहा कि जोसेफ बिल्कुल निर्दोष है, इसलिए न्याय के हित में वह जमानत के हकदार हैं। अब मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।
दरअसल, रिश्वत मामले में एसआई मोहन सिंह समेत कई अन्य पुलिसकर्मियों का नाम शामिल है। इस मामले में शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट और जोसेफ ने सीबीआई अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत वापस नहीं ली, इसलिए जोसेफ को डराने के लिए एनडीपीएस का झूठा मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि शिकायत वापस लेने के लिए उन पर सभी पुलिसकर्मियों ने दबाव बनाया साथ ही झूठे मामलों में फंसाकर जेल में डालने की धमकी भी दी। उन्होंने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर एनडीपीएस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की गुहार भी लगाई थी। शिकायतकर्ता ने मनीमाजरा की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर पर भी मुकदमा चलाने की मंजूरी भी मांगी थी लेकिन चंडीगढ़ के डीआईजी के मना करने पर उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
यह है मामला
फआईआर के मुताबिक, सेक्टर-39 थाना पुलिस 38/39 की डिवाइडिंग रोड पर गश्त कर रही थी। इस दौरान एक युवक साइकिल ट्रैक से टी-प्वाइंट की तरफ आता दिखाई दिया लेकिन वह पुलिस पार्टी को देखकर घबरा गया और अपने हाथ में पकड़े लिफाफे को छिपाकर पीछे मुड़कर तेज कदमों से चलने लगा। पुलिस ने शक होने पर उसे पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उससे 26 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए। पुलिस ने उसकी जेब से एक देसी तमंचा भी बरामद किया था। लाइसेंस या परमिट मांगने पर वह पेश नहीं कर पाया, जिसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत समदर्श उर्फ जोसेफ के खिलाफ मामला दर्ज किया था।