जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता ने कहा कि संज्ञेय अपराधों में समझौता दोनों पक्षों की सहमति से संभव है। लेकिन गंभीर अपराधों में समझौता नहीं हो सकता।
छेड़छाड़ की धारा 354 संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में आती है। इसलिए ऐसे मामलों में समझौते की संभावना दोनों पक्षों की सहमति से संभव है। समाज की भलाई को देखते हुए न्यायालय में लंबित कई ऐसे मामले हैं, जिनमें राजीनामा हो सकता है।
राजीनामे से समाज में भाईचारा भी बना रहता है। न्यायालयों में चल रहे कई किस्म के मामले राजीनामा हो सकने वाली श्रेणी में आते हैं। सेशन जज गुप्ता शनिवार को अपने चैंबर में पत्रकारवार्ता में बोल रहे थे।