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जज ने वकील से कहा, वकालत छोड़ दो

Thu, 13 Nov 2014 02:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फर्जी आदेश पेश कर होशियारपुर जिले की दसूहा अदालत में प्लॉट का कब्जा रुकवाने के मामले में जस्टिस हेमंत गुप्ता पर आधारित डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान फर्जी आदेश पेश करने वाले वकील के खिलाफ ऐसे कई अन्य मामलों का भी खुलासा हुआ।
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बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान खरड़ के सनी इनक्लेव निवासी अमित शर्मा को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उसे वकालत छोड़ देनी चाहिए। इसी मामले से जुड़े एक अन्य वकील ने सुनवाई के दौरान बेंच को बताया कि अमित एक ब्लैंक चेक के जरिए 1.90 लाख के गबन में शामिल है।

एक अन्य मामले में सामने आया कि किसी अन्य वकील की जायदाद के कागजात की प्रति के आधार पर उसने एक बैंक से ऋण लिया और जायदाद की कुर्की तक की नौबत आ गई थी। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए बेंच ने अमित शर्मा को कड़ी फटकार लगाई और अंत में फैसला सुरक्षित रख लिया।
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यह था पूरा मामला

होशियारपुर जिले की दसूहा अदालत में चल रहे मामले के मुताबिक सतीश चंद्र के प्लॉट पर दो भाइयों मुरारी और विद्या ने कब्जा कर रखा था। दोनों भाई केस हार गए थे।

सतीश ने प्लॉट का कब्जा देने के फैसले को लागू कराने के लिए दसूहा अदालत में एग्जीक्यूशन अर्जी दी थी, लेकिन मुरारी और विद्या ने हाईकोर्ट के जस्टिस आरएन रैना की बेंच के नाम का एक आदेश दसूहा अदालत में पेश किया कि कब्जे पर रोक लग गई है।

इसके बाद इस रोक को हटवाने के लिए सतीश चंद्र ने एडवोकेट सतबीर सिंह राठौर से मुलाकात की। कब्जे पर रोक के जिस फैसले का हवाला दसूहा अदालत में दिया गया था, उसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अगली तारीख 18 सितंबर दर्शाई गई थी। राठौर ने जब इस तारीख के केस देखे तो ऐसा कोई मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन नहीं था और न ही ऐसा कोई निर्देश हुआ था।

राठौर ने जस्टिस रैना को पत्र भेजा कि इस मामले की जांच कराई जाए। होशियारपुर के सेशन जज ने भी इस संबंध में हाईकोर्ट को पत्र भेजा था। इसी कारण हाईकोर्ट में मुरारी, विद्या और एडवोकेट एके कालिया के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू हुई थी।

इस मामले में बेंच को बताया गया था कि फैसले का मैसेज अमित शर्मा ने मोबाइल से भेजा था। एक बैंक खाते का नंबर भी दिया था, जिसमें पैसे जमा कराने को कहा था। हाईकोर्ट ने अमित शर्मा के वारंट जारी किए थे।
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