खबर मिलने के बाद राजकुमार ने जब अपने भाई संजीव बंसल से बात की तो उसने कहा कि वह पुलिस के पास सरेंडर करने जा रहा है। राज कुमार ने यह बयान साल 2008 को सीबीआई में दर्ज कराया था, लेकिन शनिवार को वह मुकर गया। उसने कहा कि कभी भी उसने ऐसा बयान नहीं दिया और न ही सीबीआई ने उसे कभी बुलाया ।
आरोपी संजीव बंसल की पत्नी रेनू बंसल भी अपने बयान से मुकर गई। साल 2008 को रेनू ने दो सितंबर और छह दिसंबर को सीबीआई को दर्ज अपने बयान में बताया था कि संजीव ने उसे फोन पर 15 लाख रुपये मुंशी प्रकाश राम को देने को कहा था। यह पैसे आठ से साढ़े आठ बजे के बीच देने के लिए कहा था।
साथ ही यह भी बोला था कि जब मुंशी आए तो उसे कहना कि यह पैसे रविंदर ने दिए हैं। इस दौरान रेनू ने मुंशी को यह भी कहा था कि संजीव ने यह पैसे निर्मल यादव को देने के लिए कहा है। शनिवार को वह साल इस बात से मुकर गई। उसने कहा कि सीबीआई ने उसे कभी नहीं बुलाया और न ही बयान दर्ज किए। तीसरे गवाह जीरकपुर निवासी संतोष त्रिपाठी ने कहा कि अगस्त 2008 से लगभग पांच महीने पहले वह लीगल वर्क सीखने संजीव के ऑफिस जाता था। उसके प्लेन पेपर पर साइन लिए गए थे।
यह है पूरा मामला
13 अगस्त 2008 को हाईकोर्ट के जज निर्मलजीत कौर के घर दिल्ली के एक व्यापारी रविंद्र कुमार की ओर से 15 लाख रुपये भेजे गए थे। जज ने इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि प्रकाश राम नाम के एक व्यक्ति ने पैकेट उन्हें दिया था। चंडीगढ़ पुलिस के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि वह रुपये जज निर्मल यादव को देने थे। गलती से रुपए जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए। उसके बाद सीबीआई ने प्रकाश राम को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ।