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एजेंटों के जाल में फंसकर इराक में बनते हैं बंधक, फिर वतन वापसी को तड़पते हैं युवा

Thu, 22 Mar 2018 10:10 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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इराक समेत अन्य खाड़ी देशों में जाने वाले अधिकतर युवा एजेंटों के जाल में फंसकर वहां दर्दनाक जिंदगी गुजारने को मजबूर होते हैं। कई माह तक उन्हें बिना वेतन के काम करने को मजबूर होना पड़ता है। फिर ये युवक वतन वापसी को तड़पते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में उनकी वतन वापसी बहुत मुश्किल हो जाती है।
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आज भी इस तरह कई युवा इराक में ऐसा ही जीवन बसर करने को विवश है। 2015 में भी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु  के 185 युवक  इराक के बसरा शहर की सपोर्ट सिटी स्थित अब्दुला अल जमूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में कई महीनों तक  बंधुआ मजदूर बनकर रहे। हालात जब बदतर हुए तो इन युवकों ने व्हॉटसअप के जरिए भारत सरकार से गुहार लगाई।
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बेवकूफ  बनाकर ले जाते हैं एजेंट

फाइल फोटो
आत्महत्या की धमकी दी
परिजनों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर इन युवकों की वतन वापसी का दबाव बनाना शुरू किया। युवकों ने इराक में ही आत्महत्या करने की धमकी दी थी। 0सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए हस्तक्षेप किया। युवकों को छुड़वाकर वतन वापस लाया गया। टिकट का इंतजाम भी सरकार द्वारा किया गया। भारतीय दूतावास और इमीग्रेशन अफसरों ने ही दबाव बनाकर कंपनी से उनके जबरन जब्त किए पासपोर्ट भी दिलवाए।

बेवकूफ  बनाकर ले जाते हैं एजेंट
इराक से लौटे युवक अजय कुमार ने बताया कि अधिकतर युवकों को एजेंट बेवकूफ बनाकर यहां ले जाते हैं। जितना वेतन देने की बात होती है, वहां जाकर उससे आधा ही वेतन मिलता है। कंपनी जब युवकों की टोली को वाहनों में भरकर ले जाती है, तभी वे लोग कंपनी से बाहर निकलते हैं। वे खुद तीन साल तक कंपनी में ही बंधुआ मजदूर की तरह रहे।

ज्यादा विरोध करने वाला हो जाता था गायब
युवक मलकीत सिंह ने बताया कि जाते ही कंपनी मालिक सबसे पहले उनके पासपोर्ट जब्त कर लेते हैं। जो युवक ज्यादा विरोध करता था, तो उसे वहां से ले जाते थे और वो कहां जाता था, किसी को मालूम नहीं चलता था। 
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