इराक समेत अन्य खाड़ी देशों में जाने वाले अधिकतर युवा एजेंटों के जाल में फंसकर वहां दर्दनाक जिंदगी गुजारने को मजबूर होते हैं। कई माह तक उन्हें बिना वेतन के काम करने को मजबूर होना पड़ता है। फिर ये युवक वतन वापसी को तड़पते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में उनकी वतन वापसी बहुत मुश्किल हो जाती है।
आज भी इस तरह कई युवा इराक में ऐसा ही जीवन बसर करने को विवश है। 2015 में भी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु के 185 युवक इराक के बसरा शहर की सपोर्ट सिटी स्थित अब्दुला अल जमूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में कई महीनों तक बंधुआ मजदूर बनकर रहे। हालात जब बदतर हुए तो इन युवकों ने व्हॉटसअप के जरिए भारत सरकार से गुहार लगाई।