आग से बचाते-बचाते पिछले पांच साल में जिन तीन फायरकर्मियों ने शहादत दी, उनके परिवारों को अब मुआवजे के साथ-साथ नौकरी भी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। नाइलिट हादसे का एक साल पूरा होने पर सोमवार को प्रशासन ने इसके लिए जल्द ही पालिसी बनाने का निर्णय लिया। साथ ही इस समय खाली 25 फायर कर्मचारियों के पद भी भरे जाएंगे।
‘अमर उजाला’ ने 8 जून के अंक में ‘न आग बाकी, न राख बाकी, यह मलबा गवाह है कि इंसाफ बाकी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर शहीदों के परिवार के दर्द को बयां किया था। इसके बाद प्रशासक के सलाहकार विजय देव ने यूटी सेक्रेटेरिएट में बैठक बुलाकर चीफ फायर अफसर सुनील भाटिया से पूछा कि शहीद के परिवार को अभी तक मुआवजा और नौकरी क्यों नहीं दी गई।
भाटिया ने कहा कि अभी तक इस तरह की कोई पालिसी नहीं है। यह सुनकर मेयर पूनम शर्मा ने भी गुस्सा दिखाते हुए पूछा कि जब अभी तक 25 पद खाली पड़े हैं तो एक शहीद अमरजीत के बेटे को तो नौकरी मिल सकती थी? इस पर निर्णय लिया गया कि प्रशासन अब नई पालिसी बनाकर शहीदों के परिवारों को राहत दिलाएगा।