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Chandigarh News: लोकसभा चुनाव से पहले बिखर गया जजपा का कुनबा

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एक महीने में 12 पदाधिकारियों ने छोड़ी पार्टी, विधायक भी लाइन में लगे
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पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव लड़ने का संकट, सबके निशाने पर आई पार्टी

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पांच साल पहले 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अस्तित्व में आई जनननायक जनता पार्टी (जजपा) का कुनबा 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही बिखरने लगा है। साढ़े चार साल पहले हरियाणा की सत्ता में किंगमेकर बनकर उभरी जजपा में भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद से भगदड़ मच गई है। 12 मार्च के बाद से अब तक 12 बड़े पदाधिकारी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। मंगलवार को कलायत विधानसभा क्षेत्र से 2019 में जजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुके पूर्व विधायक सतविंद्र राणा और प्रदेश महासचिव रमेश गोदारा ने भी पार्टी छोड़ दी। प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह ने भी मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया।
पार्टी के कई विधायक भी जजपा से पीछा छुड़ाना चाहते हैं, मगर दल-बदल कानून की वजह से वह बड़ा कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। पार्टी छोड़ने का मन बना चुके जजपा के तीन से चार विधायक न तो पार्टी की बैठकों में जा रहे हैं और न पार्टी की जनसभाओं में। बरवाला से जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने पार्टी अध्यक्ष को पत्र भेजकर पार्टी के सभी पदों और दायित्वों से मुक्त करने की मांग की है। अब जजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा चुनाव है। पार्टी के बिखरने के बाद चर्चा है कि क्या जजपा राज्य की दसों लोकसभा सीट पर उम्मीदवार खड़ा करेगी। लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन ही विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार करेगा।
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जजपा में भगदड़ पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह के इस्तीफा देने के बाद से गहराई है। निशान सिंह जजपा के शीर्ष नेतृत्व के काफी करीबी हैं। पार्टी ने उन्हें मनाने की काफी कोशिश की, मगर बात नहीं बनी। 2019 में कांग्रेस से जजपा में आए पूर्व विधायक सतविंद्र राणा ने भी पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय चौटाला को अपना इस्तीफा भेजा है। राणा ने पार्टी हाईकमान पर साढ़े चार साल के कार्यकाल में पार्टी नेताओं व जन प्रतिनिधियों को तवज्जो न देने का आरोप लगाया है।
बरवाला से विधायक जोगीराम सिहाग ने पार्टी के सभी पदों व दायित्वों से मुक्त करने के लिए पत्र लिखा है। जोगीराम सिहाग जजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ रोहतक लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी भी थे। हालांकि वे कुछ दिनों से पार्टी की गतिविधियों से दूर रह रहे थे। पार्टी के एक अन्य विधायक अमरजीत ढांडा के भी इस्तीफे की चर्चा चली, मगर उन्होंने इसे अफवाह बताया। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन कुछ लोग और जजपा से इस्तीफा दे सकते हैं।
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नेताओं को जजपा में नहीं दिख रहा भविष्य, इसलिए भगदड़ : त्यागी
सत्ता से दूर होते ही पार्टी के नेताओं का विरोध शुरू हो गया। बीते सप्ताह कुछ इलाकों में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का विरोध हुआ। इससे पार्टी में शामिल अन्य नेताओं को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी। पार्टी से उन्हें कोई उम्मीद नहीं दिखाई पड़ रही है। वहीं, गठबंधन से अलग होने के बाद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी विधायकों व पदाधिकारियों के बीच भरोसा नहीं जगा पाया। हरियाणा की राजनीति पर पॉलिटिक्स ऑफ चौधर किताब लिखने वाले सतीश त्यागी ने बताया कि साढ़े चार साल पहले जजपा के नेतृत्व ने जो कदम उठाया था, अब उस पर पछतावा हो रहा है। इसलिए पार्टी को एकजुट करने में सामर्थ्य नहीं जुटा पा रहे। उन्होंने कहा कि इनेलो से अलग होकर अजय और दुष्यंत चौटाला ने जब जजपा बनाई तो लोगों को उम्मीद बंधी थी। 2019 में जिन लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ा, बाद में उन्हीं के साथ सरकार बना ली। इससे समर्थकों को बड़ा झटका लगा, खासकर जाट समुदाय। सत्ता से हटने के बाद जजपा में शामिल लोगों को अहसास हो गया है कि पार्टी में रहकर अब उनका भविष्य नहीं है।
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फूफा की तरह हर छह महीने में रूठ जाते थे निशान सिंह : रविंद्र बेनीवाल
फतेहाबाद के जिला पदाधिकारियों का आरोप- निशान सिंह कार्यकर्ताओं का करते रहे शोषण
फतेहाबाद। निशान सिंह के इस्तीफा देते ही मंगलवार को जजपा के फतेहाबाद जिला पदाधिकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र बेनीवाल और रतिया विधानसभा क्षेत्र प्रधान राकेश सिहाग ने जजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में निशान सिंह पर कार्यकर्ताओं का शोषण करने तक के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि जैसे शादी समारोह में फूफा रूठते हैं, वैसे ही हर छह महीने में निशान सिंह रूठ जाते थे। हलका स्तर के पदाधिकारियों के साथ भी उलझते रहते थे। उन्होंने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र लेगा ने ही पार्टी छोड़ी है। इनके अलावा जिले से संगठन के किसी नेता ने पार्टी नहीं छोड़ी। संवाद
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