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जाट आरक्षण: 7 साल की लड़ाई 70 मिनट में हारी

Wed, 18 Mar 2015 05:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्रीय सेवाओं में खत्म किए गए जाटों के आरक्षण के फैसले के बाद एक बार फिर यह मुद्दा गर्मा गया है। आरक्षण खत्म किए जाने के फैसले से जाट समुदायों में रोष है। जाट नेताओं के मुताबिक सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद  22 मार्च को जींद में पंचायत बुलाई गई है, जहां आगे की रणनीति पर निर्णय होगा। जानिए जाट आरक्षण की आग शुरू से अंत तक।
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- 26 जनवरी 2008 में शुरू हुई थी राज्य में आरक्षण की लड़ाई
-  फरवरी-मार्च 2012 में हिसार में 23 दिन तक राज्य में आरक्षण की मांग को लेकर चला था आंदोलन
- इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-10 और हिसार- चंडीगढ़, हिसार-दिल्ली रेल मार्ग को जाम कर दिया गया था
- छह मार्च 2012 को हिसार के मय्यर गांव में पुलिस की गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई थी
- इसके बाद आंदोलन और भड़का, रोहतक, भिवानी, हिसार, झज्जर, जींद आदि जिलों में दस दिनों तक जनजीवन ठप रहा।
- सितंबर 2012 में खाप पंचायतों ने जींद के गांव दनौंदा कलां में बैठक करके हरियाणा सरकार को तीन महीने का समय दिया था
- 17 दिसंबर 2012 को कांग्रेस सरकार ने घोषणा कर दी कि हरियाणा के जाटों को विशेष श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिलेगा
- 24 जनवरी 2013 को हरियाणा सरकार ने बाकायदा आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए अधिसूचना जारी की
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केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की लड़ाई

- 19 दिसंबर 2013 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जाटों को ओबीसी की श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की
- 4 मार्च 2014 को लोकसभा चुनाव की घोषणा से ऐन पहले जाटों को ओबीसी आरक्षण की केंद्रीय सूची में शामिल किया गया
- दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा के अलावा राजस्थान (भरतपुर और धौलपुर) के जाटों को आरक्षण का दिए जाने की घोषणा की गई।

जाट आरक्षण का केन्द्र बिंदु रहा है मय्यड़ गांव
हिसार। मार्च 2011 में शुरू हुए जाट आरक्षण का केंद्र बिंदु मय्यड़ गांव रहा है। किसान एक्सप्रेस पर हुए पथराव मामले को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण रद किए जाने के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों ने बताया है कि कुछ युवकों ने ट्रेन पर पथराव किया। उन्होंने रेल रोकने की भी कोशिश की थी। लोको पायलेट ने बताया है कि ट्रैक पर पत्थर रखे हुए थे। सूत्रों का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मय्यड़ गांव में गोली लगने से एक युवक की जान चली गई थी।

इसके अलावा हिसार का ही एक अन्य युवक की भी आरक्षण आंदोलन के दौरान जान चली गई थी। मृतक संदीप कड़वासरा और सुनील श्योराण थे। आरक्षण की मांग को लेकर प्रदेश भर के जाट नेता इसी गांव से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे। आरक्षण के दौरान लम्बे समय तक ट्रैक को जाम रखा गया था। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग भी जाम रहा।
 
ईशाक मोहम्मद, शाखा सचिव एनडब्ल्यूआरईयू ने बताया कि कल इस मामले की जांच करवाई जाएगी। पत्थरबाजी किस बात को लेकर हुई अभी कहना जल्दबाजी होगा।
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