हरियाणा सरकार की ओर से जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में शैक्षिक संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण दिए जाने के मामले में क्रीमीलेयर संबंधी नोटिफिकेशन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 24 अगस्त तक स्थगित कर दी।
मंगलवार को जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ के समक्ष इस मामले में सुनवाई शुरू होते ही हरियाणा सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने कोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार विशेष पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के तहत क्रीमीलेयर को आरक्षण लाभ से अलग रखने संबंधी अधिसूचना तैयार कर रही है और इसे जल्द से जल्द कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया जाएगा। सरकार के वकीलों ने कोर्ट से इसके लिए कुछ समय की मांग की, जिसे खंडपीठ ने याची पक्ष की राय जानते हुए स्वीकार कर लिया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान जाट सभा की ओर से आरक्षण के पक्ष में रखी गई दलीलों के तहत क्रीमीलेयर का विषय उठाया गया था। जाट सभा की ओर से तब कोर्ट में हाजिर एडवोकेट कुंडू ने आरक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा साहनी केस पर आए फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि इंदिरा साहनी केस में भी आरक्षित वर्ग से क्रीमीलेयर को अलग किया गया है, ठीक उसी तरह हरियाणा सरकार ने भी जाटों व पांच अन्य जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में आरक्षण देते हुए क्रीमीलेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखा है।
उन्होंने अदालत से कहा कि केंद्र सरकार की ओर से छह लाख रुपये से अधिक की सालाना आमदनी वालों को क्रीमीलेयर मानते हुए आरक्षण के लाभ से बाहर किया गया है। हरियाणा सरकार ने भी इसे अपनाते हुए आरक्षण संबंधी कानून बनाया है, इसलिए हरियाणा सरकार की ओर से बनाया कानून बिल्कुल सही है।
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की यह दलील पूरी तरह गलत है कि हरियाणा सरकार ने जाटों को आरक्षण गलत तरीके से दिया है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और जाट सभा से वह नोटिफिकेशन पेश करने को कहा, जिसके तहत हरियाणा में जाटों को आरक्षण देते हुए क्रीमीलेयर को उससे बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
खाप नेताओं में सरकार के खिलाफ शुरू किया अनशन
मंगलवार को हरियाणा सरकार की ओर से जाट आरक्षण को लेकर क्रीमीलेयर संबंधी नोटिफिकेशन तैयार नहीं होने की बात कहे जाने पर हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, तो कोर्ट में मौजूद खापों और विभिन्न पंचायतों के नेता काफी मायूस हुए। उन्होंने हाईकोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए हरियाणा सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी और आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी। इसके बाद देर शाम सभी खाप नेता हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे और आवास के बाहर अनशन शुरू कर दिया।
इससे पहले हाईकोर्ट परिसर में धर्मपाल हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जाटों को आरक्षण देने के बारे में हरियाणा सरकार की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई से तो संतुष्ट हैं, लेकिन हरियाणा सरकार से नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आरक्षण संबंधी कानूनी प्रक्रिया की सरकार को जानकारी नहीं है।
सरकार छह महीने बीत जाने पर भी क्रीमीलेयर संबंधी नोटिफिकेशन जारी नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बार-बार जनरल इंस्ट्रक्शन पेश किए जाने की बात कह कर मामले को कोर्ट में लटकाया जा रहा है, जिससे जाटों को सरकार पर भरोसा नहीं रह गया है। धर्मपाल ने कहा कि आगामी 13 तारीख को रोहतक में बुलाई गई रैली में सरकार की नीयत को देखते हुए अंतिम फैसला लिया जाएगा।
सुरेंद्र सिंह दहिया ने कहा कि एजी हरियाणा की ओर से हाईकोर्ट से नोटिफिकेशन दाखिल करने के लिए समय मांगना, बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार जाट आरक्षण के मामले को लटकाए रखना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो सभी खापों के प्रतिनिधि एजी हरियाणा के बाहर आमरण अनशन शुरू कर देंगे। मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के समय धर्मपाल हुड्डा और सुरेंद्र सिंह दहिया के अलावा जगबीर दहिया (सरपंच, छोटा पानी), जगबीर सिंह मलिक, रणधीर सिंह मलिक, महावीर सिंह कुंडू, कृष्णा (सरपंच, ससाणा), टेकचंक कंडेला, सूबे सिंह सांगवान, बलबीर सिंह रेडू, दलबीर सिंह नैन, नरेंद्र सिड्डा व बलवंत प्रधान (फतेहाबाद) भी मौजूद थे।