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नहीं हटी जाट आरक्षण पर रोक, हाईकोर्ट की नियमित बेंच करेगी सुनवाई

Tue, 21 Jun 2016 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जसिया में धरनास्थल पर मंच से भाषण के दौरान अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक - फोटो : amar ujala
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने हरियाणा में जाटों सहित छह जातियों को आरक्षण के खिलाफ व पक्ष में दायर याचिकाओं पर सुनवाई को नियमित बेंच के हवाले करते हुए सुनवाई की अगली तिथि चार जुलाई तय कर दी है।
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इस बीच, हाईकोर्ट की ओर से जाट आरक्षण पर लगाई गई अंतरिम रोक हटाने पहुंची हरियाणा सरकार की ओर से सोमवार को काफी दलीलें दी गई, लेकिन जस्टिस एम. जयपॉल और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने नियमित बेंच की तरफ से लगाए गए स्टे को हटाने से साफ इनकार कर दिया।

इस मामले में हरियाणा सरकार की तरफ सुप्रीम कोर्ट के वकील जगदीप धनखड़ पेश हुए। वोकेशन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि हाईकोर्ट में अवकाश होने के कारण उनके पास काम का काफी बोझ है। हर रोज 50-60 केस सुनवाई हो रही है। इसलिए इस मामले की सुनवाई नियमित बेंच ही करे।
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विधानसभा में बिल पेश कर बनाया गया कानून, इसलिए चुनौती देना संभव नहीं

जसिया में धरने पर बैठे जाट समाज के लोग - फोटो : amar ujala
हरियाणा सरकार की ओर से सोमवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही जाट आरक्षण पर पीआईएल बेंच द्वारा लगाई गई रोक से राज्य सरकार के समक्ष आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया गया। साथ ही रोक हटाने की मांग की गई। कहा गया कि सरकार ने विधानसभा में बिल लाकर जाटों समेत छह जातियों को आरक्षण देने के लिए कानून बनाया है।

ऐसे में इसकी कानूनी वैधता को चुनौती नहीं दी जा सकती। सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरक्षण पर रोक के खिलाफ राज्य में आंदोलन चल रहे हैं। हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में इस समय चल रही विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया और नए शैक्षिक सत्र के लिए शिक्षण संस्थानों की दाखिलों का काम नहीं हो पा रहा।

वेकेशन बेंच की तरफ से जब इस दलील को नहीं माना गया तो सरकार की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट मामले की अगली सुनवाई तक नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिला प्रक्रिया शुरू के लिए अनुमति प्रदान कर दे। सरकार की इस अपील का याची पक्ष ने विरोध किया।

कहा कि राज्य सरकार की ओर से दिया गया आरक्षण दबाव में लिया गया फैसला है। इस फैसले की कोई कानूनी वैधता नहीं है। सरकार ने उस केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही नकार चुका है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि राज्य सरकार की अर्जी को खारिज कर आरक्षण पर रोक बरकरार रखी जाए।
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