महम विधायक आनंद सिंह दांगी और बड़ौदा विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा पहुंचे धरने पर
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सरकार की जाट आरक्षण के लिए आंदोलनरत जाट नेताओं से बातचीत अब 17 जून को होगी। इसी दिन हाईकोर्ट में जाट आरक्षण पर अंतरिम रोक संबंधी फैसले पर सुनवाई होनी है। सरकार ने पहले 15 जून को बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन अब इसे दो दिन बढ़ा दिया गया है।
पांच जून से शुरू हुए जाटों के धरना-प्रदर्शन में अब कांग्रेस और इनेलो भी खुलकर सामने आ गई है। मंगलवार को रोहतक के जसिया में कांग्रेस के दो विधायकों के धरने पर पहुंचने के बाद इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने भी बुधवार से सभी धरनास्थलों पर जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री की जाट नेताओें के साथ 17 जून को होने वाली बैठक को लेकर सरकार के साथ अधिकारियों ने भी होमवर्क शुरू कर दिया है।
कांग्रेस और इनेलो के जाटों के समर्थन में आने से सरकार सकते में है। वजह साफ है कि पिछले जाट आंदोलन में राजनीतिक दलों के उकसावे के कारण आंदोलन जातीय हिंसा में बदल गया था, जिसका खामियाजा अभी तक भाजपा सरकार भुगत रही है। इनेलो के खुलकर सामने आने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था ने भी मंथन शुरू कर दिया है।
हम ईमानदारी से हल निकाल रहे हैं: खट्टर
मनोहर लाल खट्टर
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि जाट आरक्षण का मसला बातचीत से सुलझाया जा सकता है। सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों ने बातचीत भी शुरू की है, अच्छी बात है कि वो लोग बातचीत के लिए तैयार हुए हैं। जहां तक आरक्षण का सवाल है, हमने एक्ट बना दिया है।
हाईकोर्ट में स्टे हुआ है, उसको हटवाने के लिए कोशिश जारी है। सरकार कोर्ट में पूरी मजबूती से पैरवी कर रही है। हमने आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले उन संगठनों से भी कहा है कि वे भी अगर अपने वकील को कोर्ट में पैरवी के लिए खड़ा करें तो सरकारी वकील की तरह हम उसकी फीस भी देने को तैयार हैं।
शांति और संयम की अपील करेंगे: चौटाला
अभय चौटाला ने कहा कि वे सभी धरना स्थलों पर जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष ने आंदोलनकारियों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील करते कहा कि महम में सीएम का बयान लोगों को उकसाने वाला था। चौटाला ने कहा कि इनेलो पहले भी आरक्षण दिए जाने के पक्ष में थी और अब भी हैं। वे बुधवार को झज्जर, रोहतक, जींद व कैथल जिलों में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे धरना स्थलों पर जाएंगे।
14 जिले में धरनों की संख्या दोगुनी करने की घोषणा
जसिया में धरने पर बैठे जाट समाज के लोग
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हिसार। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 14 जिलों से धरनों की संख्या बढ़ाकर दोगुना करने और आंदोलन को एनसीआर के चार जिलों में भी शुरू करने का फैसला किया है। समिति की मंगलवार को नांगलोई में आयोजित बैठक में आंदोलन का 18 जिलों में विस्तार करने का फैसला किया गया। नई रणनीति के तहत अब पलवल, गुडगांव, फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ जिले में भी धरने शुरू किए जाएंगे और पहले से जिन 14 जिलों में धरने चल रहे हैं उनमें धरनों की संख्या दुगुनी की जाएगी।
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नहीं मिला बातचीत का न्यौता
सरकार के बुलावे को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से वार्ता के लिए कोई निमंत्रण नहीं आया है। मीडिया के माध्यम से ही पता चल रहा है कि सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया है। सरकार की तरफ से जब तक उनके पास कोई जानकारी नहीं आएगी, तब तक कोई वार्ता नहीं करेंगे।
यशपाल मलिक, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष