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रो रहा रोहतक: उम्मीदों की राख पर आंसुओं का मातम

Wed, 24 Feb 2016 10:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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जिदंगी भर की कमाई थी यह दुकान। एक-एक पैसा जोड़ कर, कर्ज लेकर परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की थी दुकान। कुछ दिन पहले तक यही दुकान दो बच्चों की पढ़ाई और घर के लिए आसरा बनी हुई थी, लेकिन अब यह आसरा, आसरा नहीं रहा, राख के ढेर में तब्दील हो चुका है। कुछ लोगों के उन्माद ने राख कर दिया 8 वर्षों से रोटी दे रही इस दुकान को।
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अब इस राख के ढेर पर सिर्फ आंसू ही टपकाए जा सकते हैं। लेकिन इन आंसुओं से राख का यह ढेर फिर आसरे में नहीं बदलेगा। पूरे परिवार की खुशियां इस राख में दबकर रह गईं। यह दर्द डी-पार्क के पास स्थित लेडिज आइटम्स की दुकान चलाने वाली ग्रीन कॉलोनी निवासी सीमा गुप्ता का है। न जाने कितनी ही सीमा के परिवार की खुशियां इस उपद्रव ने खाक कर दी।

सोमवार को सुबह से लेकर रात तक पति-पत्नी अपनी खुशियों के राख के ढेर पर बैठे आंसू बहाते रहे। आंखों में आंसू थे तो जेहन में एक ही बात, किसे दोष दें? कौन कसूरवार है? और आखिर हमारा क्या कसूर था? क्या हम किसी के आंदोलन को रोक रहे थे? क्या हम किसी से झगड़ा करने गए थे? नम लेकिन खामोश आंखें लिए ग्रीन पार्क निवासी दिनेश गुप्ता और उनकी पत्नी सीमा गुप्ता सोमवार को सुबह सुबह ही अपनी दुकान का हाल देखने पहुंचे।
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शनिवार को किसी ने यह सूचना दी थी कि उपद्रवियों ने उनकी दुकान को पहले लूटा और फिर उसमें आग लगा दी। दुकान की दहलीज पर बैठी सीमा बार बार हसरत भरी निगाहों से दुकान को देखती। जब जब देखती आंखों में दर्द, आंसू बनकर झलक जाता। सीमा ने बताया कि उसके पति दिनेश एलआईसी में क्लर्क हैं। बेटा शुभम दिल्ली में फर्स्ट ईयर का छात्र है और बेटी शिनम रोहतक के एक निजी स्कूल में 11वीं की छात्रा है।

दोनों बच्चों की पढ़ाई बेहतर ढंग से करवा सकें और पति का साथ देने के लिए यह दुकान की। सीमा बताती हैं कि दुकान में लाखों रुपये का माल था, लेकिन अब सिर्फ राख बची है। हमारी उम्मीदों और खुशियों की राख। सीमा के पास ही बैठे उसके पति दिनेश के मुंह से कोई शब्द नहीं निकला, लेकिन बर्बादी की मायूसी चेहरे पर कब्जा जमाए बैठी रही और आंसुओं की बूंद दर्द में इजाफा करती रही।

रमन गुप्ता की रोजी रोटी का जरिया खत्म कर दिया

ऐसा ही दर्द पास की दुकान के मालिक का भी है। रमन गुप्ता पिछले 18 वर्षों से ऑर्चिस गैलरी चलाते रहे। हर खुशी के मौके पर इनकी दुकान से लोग गिफ्ट खरीदकर अपनी खुशियों में इजाफा करते थे। लेकिन अब उन्हीं की खुशियों पर ग्रहण लग गया। रमन ने बताया कि शनिवार को कुछ लोगों ने उनकी खुशियों में भी आग लगा दी। एक मात्र यही दुकान थी जो कमाई का जरिया थी।

कई रिश्तेदारों, दोस्तों, बैंक से कर्ज लेकर दुकान शुरू की थी। घर का चूल्हा जलाने केलिए यहीं दुकान हौसले का ईंधन देती थी। लेकिन घर का चूल्हा जलाने वाली यह दुकान, खुद ही जल गई। ऐसा किसने किया? क्यों किया ?

यह सवाल अब बेमानी है, लेकिन अब क्या होगा? कैसे होगा? घर कैसे चलेगा? यह सवाल मौत की तरह सामने खड़ा है। रमन को एक छोटी आस जरूर है.. शायद सरकार मुआवजा दे दे और जिंदगी की गाड़ी फिर पटरी पर आ जाए। लेकिन आह भर कर वह यह भी कहते हैं पता नहीं ऐसा होगा भी या नहीं?

100 साल की मेहनत हो गई खाक
गुलाब रेस्टोरेंट के मालिक सुधीर गुप्ता ने बताया कि बडे़ बाजार में उनका 100 साल पुराना व्यापार है। वे शीला बाईपास पर 25 साल से रेस्टोरेंट चला रहे थे, लेकिन उनकी मेहनत खाक में तबदील कर दी गई। शीला बाईपास पर करीब डेढ़ करोड़ की कीमत का भव्य रेस्टोरेंट दंगा करने वालों ने आग के हवाले कर दिया।

बार-बार संपर्क के बाद भी प्रशासन और पुलिस मदद को नहीं आए। पहले शुक्रवार को रेस्टोरेंट को लूटा गया, फिर शनिवार को आग लगा दी गई। स्टाफ पिछले दरवाजे से निकल गया नहीं तो उनकी भी जान जा सकती थी। बाबरा मोहल्ले में घर पर स्वयं पहरा देना पड़ रहा है। यहां कोई सेना या पुलिस नहीं है। अभी भी असामाजिक तत्व यहां घूमते रहते हैं।

मेरे साथ 150 लोगों का छीन लिया रोजगार
जींद बाईपास स्थित हुंडई शोरूम संचालक अमित जैन ने बताया कि सब कुछ खाक हो गया। मेरे करीब 150 कर्मचारी भी बेरोजगार हो गए हैं। शोरूम में उनकी, खरीददार की और नई कारें थी। घटना के बाद सभी ने 100 नंबर पर दमकल को फोन भी किया, लेकिन सभी ने जवाब दे दिया कि वे कोई सहायता नहीं कर सकते। दमकल विभाग का कहना था कि उनके पास प्रशासन के आदेश नहीं हैं। फरवरी 2008 में उन्होंने शोरूम को शुरू किया था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। यदि शोरूम दोबारा खड़ा करने की सोचेंगे तो एक साल कम से कम चाहिए।
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टैक्स भरने वाले की भी सुरक्षा नहीं कर पाई सरकार

आरएन मॉल के संचालक देवेश ने बताया कि उपद्रवियों ने उनके पास कुछ नहीं छोड़ा, वित्त मंत्री के बाद इस बवाल में उनका सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उपद्रवियों ने पहले ब्लैक बेरी का शोरूम लूटा और आग लगा दी। इसके बाद आरएन मॉल में घुसे और तोड़फोड़ की, आग लगा दी। उन्होंने मैकडोनाल्ड, शोरूम, जिम और थियेटर को जला दिया।

छह माह पहले शुरू हुए व्यवसाय में करीब छह करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मॉल में विश्व का नंबर वन लाइव फिटनेस सिस्टम था। आटोमेटिक फायर सिस्टम ने आग को बढ़ने से रोका, लेकिन तीन बार आग लगाई गई। शहर के अन्य मॉल सही हैं, कुछ ही टारगेट किए गए।

सरकार आंदोलन में मरने वालों के परिवारों को एक माह में दस लाख रुपये और नौकरी देने की बात कह रही है। जबकि आठ लाख रुपये महीने का टैक्स देने वाले की सुरक्षा भी नहीं कर पाई। वहीं, गोहाना पानीपत रोड पर आरएन इंजीनियरिंग कॉलेज भी जला दिया गया। इसमें करीब दो हजार लोग घुसे और सब तहस-नहस कर दिया। जो सामान उठाकर ले जा सकते थे उसे ले गए बाकी सब तोड़ दिया। इसमें करीब आठ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

फायर ब्रिगेड भी बिना पुलिस सुरक्षा आने को तैयार नहीं हुई। डीसी साहब ने फोन पर कोई जवाब नहीं दिया। अब आखिरी उम्मीद सरकार से मिलने वाला मुआवजा है। यदि तीन माह में हमें नहीं मिला तो भूख हड़ताल करेंगे। रात को घर के बाहर स्वयं पहरा देना पड़ा रहा है। हाईकोर्ट में अपील करेंगे कि इतना टैक्स देने के बाद हमारी सुरक्षा का इंतजाम क्यों नहीं किया गया।
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