जाट आंदोलन के दौरान सरकार ने बहुत ढिलाई बरती, ऐसा कहते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने सीएम खट्टर को खरी-खरी सुनाई। मोरनी की मनोरम पहाड़ियों में हुई हरियाणा भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में माहौल मनोरम नहीं रहा। जाट आरक्षण के प्रारूप पर हुए हंगामे के कारण प्रारूप पर चर्चा तक नहीं हो सकी।
माहौल कुछ ऐसा गरम हुआ कि कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के सामने ही प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला से भिड़ गए। हंगामा तबहुआ जब मुख्यमंत्री ने जाट आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित करने की बात कही। इतना सुनते ही कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आम जनता में संदेश इसके विपरीत हैं। पूरे प्रदेश में इस बात की चर्चा है कि सरकार मूकदर्शक बनी रही।
कार्यकर्ताओं ने जाट आरक्षण के प्रारूप की आड़ में सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। करीब छह घंटे तक चली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तरह से बेनतीजा रही, इस बीच बस कुछ ही प्रस्ताव पास हो सके। कार्यकर्ताओं का गुस्सा देख मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोग उन्हें सरल स्वभाव का कहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार ने कठोर निर्णय नहीं लिए हैं।
प्रदेश में रामपाल प्रकरण और भ्रूणहत्या के आरोपियों पर कार्रवाई का हवाला देते हुए सीएम ने अपनी बात कार्यकर्ताओं के सामने रखी। कहा कि हम जानमाल का नुकसान नहीं चाहते थे, लेकिन अंत में गोली चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकार ने फोर्थ फ्लोर से दलालों को बाहर कर दिया है। स्वभाव भले ही सरल हो, लेकिन उनके निर्णय कठोर होते हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा, सुनवाई नहीं :
इस बीच कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। भाजपा कर्मचारी प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने कहा कि कार्यकर्ता को मंत्री से मिलने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। अब उन्हें ट्यूशन की तरह पढ़ाया जा रहा है। कम से कम पार्टी फोरम पर तो उन्हें बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।
निर्दोष व्यक्तियों को ही मुआवजा :
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बैठक में स्पष्ट किया है कि निर्दोष व्यक्तियों को ही 10 लाख रुपये मुआवजा और एक सरकारी नौकरी मिलेगी। जाट आरक्षण पर राजनीतिक प्रस्ताव में शामिल आंदोलनकारी और उपद्रवी शब्द पर जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद सीएम को सफाई देनी पड़ी कि आंदोलनकारी अलग थे और उपद्रवी अलग।