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हरियाणा में जाट राजनीति चरम पर, धरतीपुत्र बनाम बाहरी में उलझे हुए हैं लोग

Tue, 24 Jan 2017 07:45 PM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा जाट आंदोलन
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हरियाणा में आजकल जाट राजनीति फिर चरम पर है। आरक्षण व अन्य मांगों को लेकर जाट चंद दिनों बाद सड़कों पर उतरने वाले हैं। घोषणा तो फिलहाल शांतिपूर्ण आंदोलन की है, लेकिन गुटों में बंटे जाट किसी भी समय उग्र रूप धारण कर सकते हैं।
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प्रदेश में इस समय जाटों में सबसे बड़ी जंग धरतीपुत्र बनाम बाहरी को लेकर भी छिड़ी हुई है। प्रदेश व देश के अन्य राज्यों में जाटों को आरक्षण को लेकर लामबंद करने वाले अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के खिलाफ हरियाणा में बाहरी होने को लेकर मोर्चा खुल गया है। मलिक सबसे ज्यादा जाट नेता हवा सिंह सांगवान गुट के निशाने पर हैं।

सांगवान गुट के नेता राजेश दहिया ने बिना नाम लिए मलिक पर जमकर भड़ास निकाली है और अलग से आंदोलन की घोषणा भी कर दी है। मलिक ने जहां 29 जनवरी से मेवात, गुरुग्राम और पंचकूला को छोड़कर 19 जिलों में देहात में सड़कों किनारे अनिश्चितकालीन धरनों की घोषणा की है तो सांगवान गुट सिर्फ रोहतक में 27 जनवरी से धरना शुरू करेगा।
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सांगवान गुट बता रहा यशपाल मलिक को बाहरी

जाट आंदोलन
सांगवान गुट ने कहा है कि हरियाणा के जाट केवल रोहतक में धरना देंगे और बाकी जगह धरना देने वाले बाहरी होंगे, उनके उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी सरकार की होगी। इससे हरियाणा के जाट आंदोलन को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

कुछ खापें भी मलिक गुट का समर्थन नहीं कर रही हैं, बावजूद इसके भी उनके साथ बड़ा जाट तबका हरियाणा का जुड़ा हुआ है। सरकार भी मलिक को बाहरी बताती रही है, इसलिए जाटों के दोफाड़ होने पर उसकी रणनीति पर सबकी निगाहें आने वाले दिनों में टिकी रहेंगी।

तो मोदी गुजरात व राहुल दिल्ली की सीमा में रहें
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक बार-बार बाहरी होने का आरोप लगने से आहत हैं। उन्होंने कहा कि देश का नागरिक कहीं भी जा सकता है। हरियाणा में क्या वे 2014 से बाहरी हो गए। ऐसे तो पीएम नरेंद्र मोदी को गुजरात और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दिल्ली की सीमा में ही रहना चाहिए। सरकार के इशारे पर कुछ लोग जाट आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश में लगे हैं।
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