हिसार में आरक्षण की मांग को लेकर ट्रैक पर जमे जाटों ने आखिरकार 36 घंटे बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर ही दी। इससे पहले जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल और कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के बीच करीब डेढ़ घंटे तक वार्ता चली, लेकिन धनखड़ के धरनास्थल पर जाकर आश्वासन देने पर सहमत न होने से विफल हो गई थी।
लेकिन बाद में जाट नेताओं को फिर से वार्ता के लिए बुलाया गया। इसमें सहमति बनने के बाद समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवासिंह सांगवान ने रविवार से आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी। इससे पहले आंदोलनकारी दूसरे दिन भी हिसार-दिल्ली ट्रैक पर डटे रहे। सांगवान की अगुवाई वाले इस आंदोलन को यशपाल मलिक गुट ने भी समर्थन दिया।
आंदोलन को मजबूती मिलती देख जाटों ने रविवार से रोहतक, भिवानी, नरवाना में भी रेलवे ट्रैक पर बैठने का एलान कर दिया था। ट्रैक जाम होने से हिसार से भिवानी, रोहतक, सिरसा रूट पर रेल सेवा बाधित रही और यात्री परेशान रहे। इन जिलों से आवागमन करने वाली ट्रेनों के रूट बदलने और यात्री भार कम होने से रेलवे को लाखों का नुकसान हुआ है।