विधानसभा चुनाव के मद्देजनर आम आदमी पार्टी की नजर पंजाब में एक ऐसे वर्ग पर टिकी है, जो चुनावी समीकरण बदलने में भूमिका निभा सकता है। हरियाणा में आरक्षण की मांग करने वाले जाट पंजाब के विधानसभा चुनाव में भाजपा-अकाली दल का खेल बिगाड़ने की मंशा से पंजाब के देसी जाटों के साथ नजर आ रहे हैं।
जाटों की ओर से चुनाव में भाजपा-शिअद दल का खुला विरोध करने की घोषणा के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मौके का फायदा उठाने की फिराक में है। जाट हालांकि सीधे तौर पर कांग्रेस या आप को समर्थन की घोषणा नहीं कर रहे, लेकिन स्पष्ट संकेत हैं कि वह सरकार बनाने की स्थिति में आने वाले दल के पक्ष में ही मतदान करेंगे।
इस बीच कांग्रेस और आप ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक से संपर्क भी साधा है।
60 फीसदी सिख आबादी में 25 फीसदी जाट हैं
चंडीगढ़ में अरविंद केजरीवाल
पंजाब की साठ फीसदी सिख आबादी में बीस से 25 प्रतिशत देसी जाट हैं। यह जाट आरक्षण को लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जाटों के साथ हर मोर्चे पर हुंकार भरने के साथ ही आंदोलनों का हिस्सा भी रहे हैं। देसी जाट मूल रूप से किसान हैं।
भाजपा और बसपा को छोड़कर बाकी दलों में जाटों का दबदबा रहा है, पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह तो अखिल भारतीय जाट महासभा के बैनर तले जाटों के लिए आरक्षण की आवाज भी बुलंद करते रहे हैं। शिअद को देसी जाटों का समर्थन पूर्व के चुनावों में मिलता रहा है, पर इस बार आरक्षण के मुद्दे पर यह छिटक गए हैं।
इसका बड़ा उदाहरण अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पंजाब इकाई के प्रधान करनैल सिंह भावड़ा हैं। वे अकाली विचारधारा के हैं और पूर्व चुनावों में शिअद का जमकर समर्थन भी किया। मगर, इस बार वह आरक्षण की मांग का झंडा बुलंदकर शिअद से दूर हो गए।
आरक्षण का मुद्दा पंजाब-हरियाणा को एकजुट करता है
kejriwal
आरक्षण ही वह मुद्दा है, जिसने पंजाब में हरियाणा और पंजाब के जाटों को भाजपा-अकाली दल के खिलाफ एकजुट किया है। जाट यूं तो जीतने वाले का समर्थन करने की बात कह रहे हैं, लेकिन उनकी मूल इच्छा यही है कि जो जीतने के बाद पंजाब में जाटों को आरक्षण देने का वादा करेगा, चुनाव में उसी की नैय्या पार लगाएंगे।
करनैल सिंह भावड़ा के अनुसार बरनाला जिले में जगतार सिंह कट्टू, बठिंडा में रजिंदर सिंह हैप्पी, फाजिल्का में सुशील कुमार व अबोहर में अजैब सिंह ने देसी जाटों को लामबंद करने की कमान संभाली हुई है। हरियाणा के जाटों की लगभग सौ टीमें फाजिल्का, अबोहर, बजुआणा, बठिंडा जिला, लहरा, पटियाला, संगरूर, फिरोजपुर, फरीदकोट में मोर्चा संभाले हुए हैं।
यह टीमें अपने रिश्तेदारों के साथ ही आरक्षण का समर्थन करने वाले जाटों को जागरूक कर रही हैं। उधर, 28 जनवरी को यशपाल मलिक जालंधर में जाटों के साथ बैठक भी करने वाले हैं।