1984 के सिख दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर को लेकर 'आप' नेता ने पंजाब कांग्रेस के प्रधान पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकील और आम आदमी पार्टी के नेता एचएस फूलका ने आरोप लगाया है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी प्रधानगी के लिए 1984 के दंगा पीड़ितों और पंजाब के मुद्दों को दांव पर लगा दिया है।
84 दंगों में लिप्त जगदीश टाइटलर और कमलनाथ को कैप्टन ने बेकसूर करार दिया है। फूलका ने सवाल किया है कि अब अदालत ने तीसरी बार टाइटलर को दी क्लीन चिट रद्द की है, ऐसे में कैप्टन को पंजाब की जनता से माफी मांगनी होगी। फूलका शनिवार को स्थानीय होटल में आयोजित कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
कैप्टन और सुखबीर हवा में रहने वाले लीडर
फूलका ने कहा कि 84 दंगों को जायज करार देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बयान ‘जब एक पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’ का जब उन्होंने वीडियो जारी किया था, तब कैप्टन ने कहा था कि फूलका तीन दशकों से सुरक्षा में रहने के लिए झूठी बयानबाजी कर रहे हैं।
फूलका ने कहा कि उन्होंने कैप्टन को चुनौती दी थी कि उनके बयानों को झूठा साबित करें, लेकिन वे आज तक ऐसा नहीं कर पाए। फूलका ने कहा कि दो दिन पहले मीडिया से बातचीत में कैप्टन ने कहा कि फूलका तो साइकिल पर घूमते हैं।
उनका तर्क है कि कैप्टन और सुखबीर जैसे लीडर हवा में रहने वाले हैं और उड़नखटोलों में घूमते हैं। जबकि वे जमीन से जुड़े है और जमीन पर ही रहने में विश्वास रखते हैं।
फूलका ने कैप्टन और सुखबीर को चुनौती दी कि अपने राजनीतिक जीवन का एक भी वाकया बताएं जब खुद मुश्किल में रहकर मेहनत करके पंजाब की जवानी को बचाने की कोशिश की है। सुखबीर बेवजह टाइटलर के केस के फैसले का फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर से पूछा, सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई गई
फूलका ने कहा कि टाइटलर को तीसरी बार क्लीन चिट दिसंबर 2014 में दी गई थी। क्लीन चिट को खत्म कराने में पूरा साल बीत गया। अदालत ने अपने फैसले में साफ लिखा है कि टाइटलर को गलत क्लीन चिट दी गई थी।
अदालत द्वारा क्लीन चिट रद्द करने का कारण सिर्फ दो गवाह पेश करना नहीं, बल्कि बड़ा कारण टाइटलर द्वारा गवाहों को डराना, धमकाना और सबूतों से हेरफेर के मामले में सीबीआई द्वारा कोई जांच न करना है।
सुखबीर जवाब दें कि इस मामले में सीबीआई ने जांच क्यों नहीं की गई। अब सुखबीर और शिअद का कहना है कि उन्होंने दो अन्य गवाहों के पते अदालत को दिए हैं। इन गवाहों के पते पहले सीबीआई को क्यों नहीं दिए गए।
पिछले 31 साल में कई गवाहों की मौत हो गई है। टाइटलर के केस में भी मुख्य गवाह सुरिंदर सिंह की मौत हो चुकी है। इन हालात में गवाहों के नाम पहले न बताकर सुखबीर किसे खुश कर रहे थे।