आईटीबीपी के दो जवानों ने गृह सचिव, चंडीगढ़ पुलिस और स्टेट बैंक के अधिकारियों के खिलाफ सीजेएम रजनीश कुमार की अदालत में 15-15 लाख की मानहानि की याचिका दायर की है।
याचिका में उन्होंने गृह सचिव अनिल कुमार, आईजी आरपी उपाध्याय, एसएसपी नौनिहाल सिंह, एयरफोर्स स्टेशन स्थित स्टेट बैंक की मैनेजर एकता महाजन, तत्कालीन सेक्टर-31 थाना प्रभारी जसपाल सिंह और जांच अधिकारी एसआई रणधीर सिंह को पार्टी बनाया है।
उन्होंने याचिका में कहा कि एक-एक हजार के असली नोट होने के बावजूद बैंक की शिकायत पर बिना जांच किए ही उनके खिलाफ सेक्टर-31 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसके अलावा उन्हें दो दिन तक पुलिस रिमांड पर रखा गया। रिजर्व बैंक ने जांच करने के बाद एक-एक हजार के नोट असली बताए थे।
सीजेएम रजनीश कुमार शर्मा की अदालत ने मामले सुनवाई करते हुए सभी को 18 दिसंबर को अदालत में पेश होने केआदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
एक-एक हजार के 91 नोट बताए थे नकली
आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल अमर सिंह और कांस्टेबल नैन सिंह 17 मई 2013 को जवानों की तनख्वाह के तीन लाख रुपये एयरफोर्स स्टेशन स्थित स्टेट बैंक में जमा कराने गए थे। बैंक ले एक-एक हजार के 91 नोटों को नकली बताया था और मामले की शिकायत सेक्टर-31 थाना पुलिस को दी थी।
सेक्टर-31 थाना पुलिस ने आईटीबीपी के दोनों जवानों को गिरफ्तार कर लिया था। बैंक मैनेजर एकता महाजन की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें पुलिस रिमांड पर हासिल किया था।
पूछताछ में दोनों जवानों ने बताया था कि उन्होंने अपने जवानों की तनख्वाह जमा करवाने के लिए जालंधर से कैश निकलवाया था। उनके 70 जवान रामगढ़ में ट्रेनिंग कर रहे थे। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।
रिजर्व बैंक ने नोटों को बताया था असली
क्राइम ब्रांच ने आईटीबीपी जवानों से बरामद एक-एक हजार के नोटों को जांच के लिए रिजर्व बैंक के पास भेजा था। रिजर्व बैंक के असिस्टेंट मैनेजर पवन कुमार लांबा ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जवानों से बरामद नोट असली हैं। इसके बाद अदालत ने दोनों जवानों के खिलाफ मामला रद्द कर दिया था।