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भाकपा ने पंजाब में भी दिया कांग्रेस को झटका

Thu, 13 Mar 2014 12:42 PM IST
अनिल भारद्वाज
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लोकसभा चुनाव में पंजाब भाकपा को अपने साथ लेने की कांग्रेसियों की कोशिशें असफल हो गई हैं।
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भाकपा ने बुधवार को फैसला लिया कि पूरे देश की तरह पंजाब में भी पार्टी कांग्रेस और भाजपा से बराबर दूरी बनाए रखेगी।
वहीं, बसपा और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की कोशिशें जारी रखी जाएंगी। इसके साथ ही पार्टी ने फरीदकोट और अमृतसर से अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी।

भाकपा की प्रदेश इकाई के सचिव बंत सिंह बराड़ के अनुसार फरीदकोट से कश्मीर सिंह गुडाया और अमृतसर से अमरजीत सिंह आंसल पार्टी उम्मीदवार होंगे।
दोनों ही पार्टी के युवा नेता हैं। बराड़ ने कहा कि इन दोनों की उम्मीदवारी से संबंधित प्रदेश इकाई का फैसला केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया गया है।
केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इस बारे में औपचारिक घोषणा जल्द कर दी जाएगी।
ध्यान रहे कि कांग्रेस ने फरीदकोट सीट भाकपा को ऑफर की थी और इस बारे में पार्टी के भीतर कई दिन तक मंथन चलता रहा।
आखिर बुधवार को चली मैराथन बैठक में कांग्रेस से समझौता न करने का निर्णय भाकपा नेतृत्व ने किया।

इस बैठक में भाकपा की केंद्रीय सचिवालय सदस्य अमरजीत कौर बतौर ऑब्जर्वर उपस्थित रहीं।
करीब पांच घंटे चली मीटिंग में फैसला हुआ कि पंजाब की केवल एक सीट के लिए पार्टी को अपने सिद्धांतों से नहीं भटकना चाहिए।
बंत बराड़ के अनुसार बैठक में अंतिम निर्णय यही हुआ कि पंजाब में कांग्रेस, भाजपा और शिअद के खिलाफ मजबूत फ्रंट तैयार करके लड़ाई लड़ी जाए।
अब भाकपा की ओर से माकपा सहित अन्य वामपंथी दलों के साथ मिलकर प्रदेश की बाकी सीटों पर उम्मीदवार तय किए जाएंगे।
बराड़ ने यह भी कहा कि बसपा और आम आदमी पार्टी से वह अपील करते हैं कि यह कांग्रेस व अकाली-भाजपा गठबंधन को हराने के लिए प्रदेश में वामदलों के साथ आएं। उल्लेखनीय है कि माकपा की ओर से पहले ही श्री आनंदपुर साहिब, लुधियाना, संगरूर और जालंधर से चुनाव लड़ने की घोषणा की जा चुकी है। हालांकि, इसकी ओर से जालंधर सीट पासला ग्रुप के लिए छोड़ी भी जा सकती है।
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कांग्रेस या इसके सहयोगियों को कोई समर्थन नहीं
बंत बराड़ ने यह भी कहा कि पंजाब की किसी भी सीट पर उनका कांग्रेस या इसके सहयोगी दलों के किसी भी प्रत्याशी को कोई समर्थन नहीं है।
अगर कोई इस तरह का दावा करता है तो यह गलत है।

बिखर गया साझा मोर्चा
भाकपा के इस फैसले के साथ ही 2012 के विधानसभा चुनाव के वक्त अस्तित्व में आया साझा मोर्चा पूरी तरह से बिखर गया।
इससे पहले पीपीपी, कांग्रेस के साथ हाथ मिला चुकी है। इसके अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल कांग्रेस-पीपीपी गठबंधन उम्मीवार के रूप में बठिंडा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। माकपा खुद को पहले ही मोर्चा से अलग कर चुकी है।
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