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एयर स्ट्राइक: पहले से तय था मदरसे को छेड़ना नहीं, बाकी टारगेट छोड़ना नहीं

Sun, 15 Dec 2019 05:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़
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Air Strike - फोटो : PTI
पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक का पहलू इंडियन एयरफोर्स की सर्वधर्म समभाव की भावना को भी दिखाता है। बालाकोट के ‘जाबा टॉप’ जहां इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जाना था, वहां इंटेलिजेंस ने आतंकियों के चार टारगेट  लोकेट किए थे। 

मगर एयर स्ट्राइक से पहले जब इसका गहन अध्ययन किया गया तो मालूम चला कि चार टारगेट में एक  भवन ऐसा है, जिसके ऊपर सफेद गुंबद बना है। यह भवन मदरसा हो सकता है या फिर मस्जिद। लिहाजा आला अफसरों की बैठक में यह पहले ही तय कर लिया गया कि इस भवन को टारगेट लिस्ट से हटा दिया जाए, उस पर कोई बमबारी नहीं की जाएगी।

यह तय किया गया कि जाबा टॉप पर बाकी बचे तीन टारगेट, आतंकियों के मुजाहिद हॉस्टल, युवा ट्रेनी हॉस्टल और ट्रेनर आवास को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। इस प्लानिंग के तहत 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना  ने बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की कोई चूक न हो, इसके लिए इंटेलिजेंस होमवर्क भी मजबूत था। 

दरअसल, 14 फरवरी को पुलवामा अटैक के बाद पाकिस्तान को जवाब देने का फैसला कर लिया गया था। जवाब कैसे देना है, एक विशेष बैठक में केंद्रीय नेतृत्व ने यह फैसला तीनों सेना प्रमुखों पर छोड़ दिया था। एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस बार एयरफोर्स को टास्क देने की बात कही थी, अंतत: फैसला लिया गया कि इस बार जवाब एयरफोर्स ही देगी।
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बालाकोट एयरस्ट्राइक (फाइल फोटो) - फोटो : twitter
पॉयलटों को भी नहीं पता था कि आधी रात को क्यों चल रही खास ट्रेनिंग
एयर स्ट्राइक की प्लानिंग होने लगी। इसके लिए वायु सेना ने कुछ खास प्रशिक्षित और अनुभवी पॉयलटों का चयन किया। उनकी आधी रात को विशेष ट्रेनिंग शुरू करवाई गई। पॉयलटों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी कि उनकी इस ट्रेनिंग की वजह क्या है? फिर 26 फरवरी को उन पॉयलटों को सीमा पार बालाकोट केजॉबा टॉप में जाकर टारगेट नेस्तनाबूद करने को कहा गया।
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फाइल फोटो: अमेरिकी हवाई हमला - फोटो : Getty
बिना वेपन खोले ही वापस लौटी थी पहली टुकड़ी
एयर स्ट्राइक में विमानों की पहली टुकड़ी को अपने मिशन में अचानक खराब मौसम से जूझना पड़ा था। एकदम से गड़बड़ाए मौसम के कारण लड़ाकू विमानों की यह टुकड़ी वेपन खोले बगैर ही लौट आई थी। इसके बाद लड़ाकू विमानों के  अन्य टुकड़ियों ने प्लानिंग के मुताबिक ऑपरेशन को बखूबी अंजाम दिया। ऑपरेशन में भारतीय विमानों द्वारा टारगेट किए गए तीन बम मिस भी हुए थे, जो कि वास्तविक टारगेट से करीब 150 मीटर, 185 मीटर व 200 मीटर दूरी पर गिर थे। अन्य विमान टारगेट को उड़ाने में पूरी तरह कामयाब रहे।
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पाक अधिकृत कश्मीर में वायु सेना का हमला - फोटो : Amar Ujala
जमीन के साढ़े तीन मीटर  नीचे तक की गई थी स्ट्राइक 
एयरफोर्स को आशंका था कि कैंप में आतंकियों ने अपने बंकर आवास बनाए हो सकते  हैं। इसलिए एयरफोर्स ने बम के ‘बंकर बस्टिंग वर्जन ऑफ स्पाइस 2000’ स्ट्राइक का इस्तेमाल किया था, जिसकी मार जमीन से करीब 3.5 मीटर भीतर तक थी। एयरफोर्स के पास इसके भी पुख्ता सुबूत हैं, कि आतंकी कैंप में इस स्पाइस 2000 की मार जमीन के नीचे तक  खतरनाक ढंग सेहुई।
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