चंडीगढ़। ‘बहुत मुश्किल है दिल की कहानी लिखना, जैसे पानी पर पानी लिखना’ बस ऐसा ही है मेरा जीवन। वैसे तो मेरा कोई बचपन नहीं है। शुरू से ही जीवन की उठापटक से उलझता रहा हूं। मेरे जितने भी साहित्य हैं, उनमें अपने जीवन के कटु सत्यों को ही लिखा है। यह बात यूटी गेस्ट हाउस में पंजाब के प्रसिद्ध कथाकार व उपन्यासकार कृपाल कजाक ने कही।
यूटी गेस्ट हाउस में रविवार को चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से ‘रूबरू’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृपाल कजाक ने बताया कि वह बेशक 10वीं फेल हैं, लेकिन कॉलेज का भी अनुभव उन्होंने लिया है। जीवन का एक समय ऐसा था कि जब उन्हें जेबकतरे की ट्रेनिंग लेनी पड़ी। इन यादों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने बताया कि कृपाल कजाक की रचनाओं को धर्मिता का परिचय देते हुए नव भारतीय भाषाओं का एक गण्यमान्य साहित्यकार बताया। कृपाल कजाक ने अपने कटु अनुभवों से साहित्य सृजन किया है। उनका साहित्य उनके जीवन का ही रूपांतरण है। पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. सरबजीत सिंह ने कृपाल कजाक की साहित्य यात्रा का परिचय दिया। इस मौके पर अकादमी के उपाध्यक्ष गुजराल सिंह संधू, एसएस रतन, सुरेंद्र गिल, कमलजीत कौर आदि मौजूद रहे।