आरोपी के बंदूक दिखा हाथ में मोबाइल लिए दुष्कर्म करते हुए वीडियो बनाने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने असंभव बताते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि कथित पीड़िता का बयान विश्वसनीय नहीं था और प्राथमिकी दर्ज करने में दो महीने की अस्पष्ट देरी हुई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि निचली अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य अभियुक्त के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यदि अभियुक्त द्वारा कथित पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया होता तो वह तत्काल पुलिस से संपर्क करती। अपनी चिकित्सा जांच कराती। साथ ही अपने पति के घर आने पर उसे सूचित करती। अभियुक्त को काम से निकाल देती। उसे अपने बच्चों को चिकित्सा देखभाल के लिए ले जाने की अनुमति नहीं देती।
प्राथमिकी में दो महीने की देरी का भी कारण नहीं
पीठ ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में दो महीने की देरी हुई है, जिसका कोई कारण नहीं है। निचली अदालत ने सही ही माना है कि अभियोक्ता और अभियुक्त के बीच संबंध सर्वसम्मति से थे।
एक सैन्य अधिकारी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके पीजी में काम करने वाले प्रवासी मजदूर ने उसकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। पीड़िता ने बयान दिया कि लगभग दो महीने पहले उसके शरीर पर चींटियां आ गईं। वह कपड़े बदलने के लिए एक कमरे में गई। वहां आरोपी ने उसका पीछा किया और बंदूक दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दाैरान आरोपी ने वीडियो भी बनाया। आरोपी ने धमकी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसके परिवार को मार डालेगा। उसने आगे बताया कि वह डर गई और उसने इस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया। निचली अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि आरोपी को फंसाया गया है।