मेरी छोटी बेटी मुझे रोज कॉल कर बस एक ही बात कहती है कि पापा आप घर आ जाओ। मैं उसे हर बार बस यही समझाता हूं कि अगर हम अस्पताल छोड़कर घर में आ गए तो कोरोना को मात कौन देगा। मेरा तो ये कहना है कि कोरोना महामारी के इस दौर में हमें अपने फर्ज से पीछे हटने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए, क्योंकि इस समय स्वास्थ्य की भूमिका अहम है। ये कहना है पीजीआई स्टाफ सरवन कुमार वैध का, जो पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। सरवन की दो बेटी और एक बेटा है।
एक-एक मिलकर ही तो ग्यारह होंगे
सरवन का कहना है कि कोरोना संक्रमण के डर से अपने फर्ज से पीछे हटने की सोच भी देश के प्रति गद्दारी होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा होने में कारण मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अंतिम समय तक अपने फर्ज के प्रति ईमानदार रहूं। जब कभी पीजीआई को मेरी जरूरत हो बिना दिन और समय की परवाह किये मैं वहां उपस्थित हो जाऊं। इस समय मैं अपनी परेशानियों को दरकिनार कर पूरी निष्ठा से कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहा हूं। इस समय एक एक जोड़कर ग्यारह करने की सोच रखनी होगी तभी देश कोरोना को शिकस्त दी पायेगा।
पहले देश और फर्ज, उसके बाद परिवार
कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के इलाज में देशभर के डॉक्टर जुटे हुए हैं। उन्हें न तो अपनी परवाह है न ही अपने परिवार की, फिर हम पीछे कैसे हट जाएं। सरवन ने बताया कि उनके साथ उनके कई सहयोगी काफी दिनों से कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। उन्हें देखकर हिम्मत मिलती है। वो भी अपने परिवार की बातें करती हैं लेकिन ड्यूटी से पीछे हटने की सोचते भी नहीं। सरवन का कहना है कि इस समय सबने मिलकर साथ दे दिया तो कोरोना क्या कोई भी मुसीबत ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकती।