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बिना अधिकारियों की मिली भगत नहीं हो सकता है काम: हाईकोर्ट

Mon, 02 Jan 2017 06:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हाईकोर्ट - फोटो : file photo
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला के टैक्सेशन इंस्पेक्टर द्वारा टैक्स की पर्ची काट कर इसे सरकारी खजाने में जमा न करवाने के मामले में जांच को आईजीपी भारती आरोड़ा की अध्यक्षता वाली एसआईटी को सौंपने के आदेश दिए हैं।
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इस मामले में पूर्व की जांच को सीधे तौर पर सवालों के घेरे में लाते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह जांच चहेतों को बचाने के लिए की गई खानापूर्ति मात्र है। मामला अंबाला के टैक्सेशन विभाग से जुड़ा हुआ है। 

आरोपों के अनुसार इंस्पेक्टर पंकज बठला ने वर्ष 1998 से 2015 के बीच 66 चालान बुक जारी करवाई थी। इन चालान बुक में से केवल 22 ही वापिस जमा करवाई गई। बाकी की चालान बुक का कोई हिसाब नहीं है। 
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आरोपों के अनुसार इससे राज्य सरकार को 38 लाख रुपए के राजस्व की चपत लगी है। मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जमानत दिए जाने की अपील की थी। 
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आईजीपी भारती अरोड़ा को हाईकोर्ट ने सौंपा जांच का जिम्मा

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हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच से जुड़े स्टेटस रिपोर्ट मांगी और साथ ही इस दौरान किया गया ऑडिट भी मंगवाया। यह रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच ऐसी है जैसे कुछ लोगों को बचाने का प्रयास किया गया है। 

यह कार्य अकेला कोई व्यक्ति नहीं कर सकता है। इसमें और लोगों के नाम भी जुड़े होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसा कैसे हो सकता है कि इतना बड़ा घोटाला हो और 17 साल में ऑडिट ने इसपर आपत्ति तक दर्ज न की है। 

हाईकोर्ट ने इस मामले में पिछली सभी जांच को दर किनार करते हुए आईजीपी भारती अरोड़ा की अध्यक्षता वाली एसआईटी बनाने के आदेश दिए। साथ ही अरोड़ा को यह छूट दी कि जो भी अच्छे और जिम्मेदार अधिकारी हैं उन्हें वे जांच में शामिल कर सकती है। मामले में अगली सुनवाई 31 जनवरी तक इस बारे में अरोड़ा की अध्यक्षता वाली एसआईटी को जवाब सौंपना होगा।

याचिका दाखिल करते हुए बठला ने कहा कि इस मामले में उन्हें फंसाया जा रहा है। जांच के दौरान 10 चालान बुक  डिस्ट्रिक्ट एक्साईज एंड टैक्सेशन अधिकारी के कार्यालय से मिली थी और ऐसे में संभावना है कि बाकी भी उनके कब्जे में हो। हाईकोर्ट ने फिलहाल याची को जमानत का लाभ नहीं दिया है।
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