पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के बीच तीखी बहस हो गई। यह मामला इतना गरमाया कि खैरा खुद पर लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए स्पीकर से बोलने की अनुमति मांगते हुए दो बार वेल में पहुंच गए लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला और आखिरकार वह सदन से बाहर चले गए।
पंचायत मंत्री धालीवाल एक मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए खड़े हुए और उन्होंने सुखपाल खैरा द्वारा सोमवार को पंचायती जमीनों पर कब्जे को लेकर लवली यूनिवर्सिटी के मालिक व सांसद अशोक मित्तल और सांसद संत सीचेवाल पर लगाए आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने सदन में बताया कि संत सीचेवाल के पास 168 कनाल 16 मरले जमीन है, जिस पर उन्होंने गोशाला बना रखी है और उसमें 300 बेसहारा गाय रखी गई हैं। धालीवाल ने कहा कि यह जमीन पंचायत की नहीं बल्कि सरकार की है।
उन्होने यह भी कहा कि सीचेवाल ने सरकार से कहा है कि वह गौशाला की गायों के लिए व्यवस्था करें तो वह सरकार को जमीन लौटा देंगे। इसके साथ ही धालीवाल ने सांसद अशोक मित्तल पर लगे आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह पूरा रिकॉर्ड लाए हैं। केवल तीन कनाल जमीन बनती है, जिस पर सड़कें बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि 2016 में चहेड़ू गांव ने यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की अदलाबदली का समझौता करते हुए एक एकड़ अधिक जमीन दी थी, वहीं यूनिवर्सिटी से मिली जमीन को ठेके पर देकर पंचायत पैसा कमा रही है।
इस पर, खैरा ने कहा कि उनकी यह बात तो सही साबित हो गई है कि सीचेवाल और लवली यूनिवर्सिटी का जमीनों पर कब्जा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन में झूठ नहीं बोला था। सरकार को यह जमीन छुड़ानी चाहिए थी। धालीवाल ने इस पर खैरा से कहा- आपके गांव में आपके शरीकों ने 10 किल्ले 7 कनाल जमीन दबाई हुई है, उसे छुड़वा दें। खैरा ने कहा- यह जमीन उनके कब्जे में नहीं है और जिसने भी कब्जाई हुई है वह इस मुश्तरका मालिकान बताकर अदालत पहुंच गया है। तब धालीवाल ने खैरा को अदालत के आदेश की प्रति भी दिखाते हुए कहा कि अब तो जमीन छुड़वा दें। खैरा ने चुनौती दी कि अगर उनके नाम पर एक इंच भी जमीन निकले तो वह सदन में नहीं आएंगे।
खैरा ने स्पीकर से जवाब देने के लिए बोलने की इजाजत मांगी। वह वेल में पहुंच गए लेकिन स्पीकर ने उन्हें बैठने और बाद में समय देने की बात कही। इसी दौरान मुख्यमंत्री सदन में पहुंचे तो कांग्रेस के सदस्य सदन से उठकर जाने लगे लेकिन खैरा अपनी सीट पर बैठे रहे। उन्होंने फिर से बोलने का समय देने की मांग की लेकिन समय नहीं मिलने पर वह भी सदन से बाहर चले गए।