इस्राइली छात्रा हदार गोल्डबर्ग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हमास के हमले के बाद इस्राइल अब फलस्तीन पर जवाबी कार्रवाई कर बदला ले रहा है लेकिन इस जंग में बेकसूर लोगों को मारना ठीक नहीं। यह बात हमास-इस्राइल जंग के बीच चंडीगढ़ पहुंची इस्राइली छात्रा हदार गोल्डबर्ग ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही। वह सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में आयोजित एक फेस्ट में हिस्सा लेने पहुंची हैं।
हदार गोल्डबर्ग इस्राइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं। उन्होंने हा कि इस्राइल पर हमास के हमले के बाद देश में नेतन्याहू सरकार के प्रति आक्रोश की स्थिति है। हमले का अंदेशा होने के बावजूद देश की खुफिया एजेंसी अपने नागरिकों का बचाव करने में असफल रही। इससे लोग काफी नाराज हैं। हदार ने कहा कि हमले के बाद दोनों तरफ से बमबारी हुई है।
बदला लेने की आड़ में इस्राइल सरकार ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। गाजा में बिजली, पानी समेत दूसरी मूलभूत सुविधाएं रोक दी गईं हैं, जिसके पक्ष में वह नहीं हैं। इजरायल को अस्तित्व में आए सिर्फ 75 साल हुए हैं और शुरू से हम टकराव व युद्ध देखते आ रहे हैं। लगातार इन टकरावों से हम थक चुके हैं। हर बार विश्व हमारे पक्ष या खिलाफ टिप्पणी करता है, बगैर पूरा सच जाने। इस वजह से अनिश्चितता भरा माहौल बना हुआ है।
हदार गोल्डबर्ग ने कहा कि गाजा की तरफ इस्राइल के दक्षिण सीमा पर भारी सेना तैनात की गई है। इसमें करीब 3000 इस्राइली सैनिक और 2000 अमेरिकी सैनिक हैं। उधर, जमीनी हमले के डर से गाजा से लाखों की संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। लोग सदमे में हैं कि इस तरह का हमला कैसे हो गया। बेघर हुए इन लोगों को अधिकतर मदद सरकार की जगह स्वयंसेवियों द्वारा दी जा रही है। हदार ने कहा कि पूरे संघर्ष को लेकर लोग अलग-अलग खेमों में बंटे हैं। कुछ लोग इस्राइल का साथ दे रहे हैं तो कुछ फलस्तीन का।
लोगों से छुपाई जा रहीं हैं महत्वपूर्ण सूचनाएं
हदार ने कहा कि सोशल मीडिया पर युद्ध की कुछ ही जानकारी साझा हो रही है लेकिन अभी भी बहुत सी चीजें हैं जिनके बारे में लोगों का पता नहीं है। दोनों तरफ से बहुत सी चीजों पर पर्दा डाला जा रहा है। किसी के पास युद्ध को लेकर पूरे तथ्य या आंकड़े नहीं हैं। गाजा के अस्पताल में हुए हमले की बात करें तो हमला किसने किया, इस पर अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा।