आईएसआईएस की विचारधारा और पाकिस्तान की मदद से घाटी में पनप रहे आतंकी संगठन आईएसआईके (इस्लामिक स्टेट इन कश्मीर) की जड़ें लड़खड़ाने लगी हैं।
इस स्थानीय संगठन को नए हैंडलर नहीं मिल रहे हैं, जो संगठन की आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें। आतंक के खिलाफ भारतीय सेना की ज्यादा सख्ती, ऑपरेशन ‘ऑलआउट’, फंड की कमी व पिछले दिनों आईएसआईएस चीफ अबू बकर अल बगदादी की मौत इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों ने यह खुलासा विगत दिवस आर्मी लिटरेचर फेस्ट में किया था। अलकायदा के लड़खड़ाने के बाद आईएसआईएस दुनिया में बड़े टेरर ग्रुप के रूप में सामने आया। इस संगठन ने अन्य देशों में अपनी जड़े फैलाने के लिए सुनियोजित ढंग से काम किया।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ आईएएस आरके कौशिक ने बताया कि इस संगठन का विभिन्न देशों में अपना विस्तार करने का सबसे बड़ा जरिया सोशल मीडिया है। जिसके जरिए ये संगठन युवाओं को अपने झांसे में लेता है।
पिछले दिनों नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने भी खुलासा किया था कि आईएसआईएस पिछले कुछ समय से कश्मीर में अपनी पैन-इस्लामिक विचारधारा का प्रचार करते हुए जिहाद के लिए कश्मीरी युवाओं की भर्ती करने, उन्हें कट्टरपंथी बनाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए उकसाने का काम कर रहा है।
कश्मीरियों के प्रोक्सी संघर्ष को हवा दे सकते हैं आतंकी संगठन
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) के अनुसार, स्थानीय संगठन आईएसआईके की प्ररेणा भले ही आईएसआईएस है। मगर ये माना जा रहा है कि वर्तमान में कश्मीर में इन संगठनों के समर्थन में विदेशी सेनानियों या स्थानीय लोगों को इकट्ठा करने की व्यवहार्यता फिलहाल संभव नहीं है।
उनके अनुसार, अनुमान के आधार पर यह आशंका जरूर है कि आईएसआईएस, अल कायदा और तालिबान जैसे विदेशी आतंकवादी तत्व लोगों के संघर्ष का समर्थन करने के लिए निकट भविष्य में कश्मीर में प्रवेश करेंगे और कश्मीर में प्रॉक्सी हाइब्रिड संघर्ष को खिलाफत के लिए युद्ध का लेबल देंगे।
चेहरे, फंड की कमी से भी हिली जड़ें
सेना के एक आला अधिकारी की मानें तो कश्मीर में इस संगठन की जड़ें फंड और चेहरे (प्रमुख हैंडलर) की कमी की वजह से भी हिल चुकी हैं। घाटी में ये संगठन आज लगभग खत्म होने की कगार पर है। इस आतंकी कैडर के तीन आरोपी इश्फाक अहमद, परवेज अहमद और आसिफ नजीर घाटी में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में मारे गए थे।
ताहिर अहमद खान, हरिस मुश्ताक व आसिफ सुहैल को गिरफ्तार भी किया गया था। सूत्रों ने बताया कि ये संगठन नए युवाओं पर सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा फोकस रखता है। कश्मीर में कुछ युवा तो अपनी हॉयर स्टडी बीच में छोड़कर इस संगठन से जुड़े थे।
सूत्रों ने बताया कि हालांकि कश्मीर में इस स्थानीय संगठन की जड़ें जमाने को पाकिस्तान ने भी मदद की, लेकिन अब फंड की कमी से घाटी में इस नवोदित संगठन का वजूद कायम रखने में बड़ी दिक्कत आ रही है।
उधर, घाटी के अलावा उतरप्रदेश, तमिलनाडु, केरल व तेलंगाना इत्यादि कुछेक राज्यों में भी आईएस की विचारधारा से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को संगठन से जोड़ने की नापाक कोशिशें की जा रही हैं।