फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'भारत लौटना है तो एक हजार डॉलर दो'

Fri, 20 Jun 2014 10:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
इराक में अंबाला के पांच युवक भी फंसे हैं। तीन युवकों का संपर्क तो सोमवार और मंगलवार को अपने घरवालों से टूट गया था, जबकि दो युवक अब भी घरवालों से संपर्क में हैं। बराड़ा के अरुण उर्फ शैंकी के बड़े भाई रणदीप ने बताया कि शुक्रवार सुबह शैंकी से बात हुई थी। उसके अनुसार आर्मी के जवानों ने 500 लोगों के जत्थे को अपने सुरक्षा घेरे में लिया हुआ है।
विज्ञापन


गर्मी के मारे बुरा हाल है। खाना-पानी के लाले पड़ने लगे हैं। वापसी के लिए टिकट तक के पैसे नहीं है। रज्जोखेड़ी के राजा सिंह के परिजन रणदीप सिंह ने बताया कि रज्जोखेड़ी गांव का राजा सिंह भी पांच महीने पहले इराक गया था। लेकिन वहां जाकर भी राजा सिंह का अब यहां अपनों परिजनों से संपर्क नहीं हो रहा है।  

सैन माजरा के परविंद्र सिंह के परिजनों ने बताया कि लगभग दो माह पूर्व उनका बेटा परविंद्र सिंह इराक गया था। वीरवार रात उनके पुत्र ने फोन पर बताया कि इराक में हालात काफी खराब हैं, पेट्रोल पंप व काफी उद्योग धंधे बंद कर दिए गए हैं और सुरक्षा कारणों के चलते बंद कमरों में रखा जा रहा है।
विज्ञापन


इन हालात में वे वापिस भारत आना चाहते हैं लेकिन एजेंट ने उनका पासपोर्ट व वीजा देने की एवज में एक हजार डालर की मांग की है लेकिन उनके पास कोई भी पैसा न होने के कारण उन्हें पासपोर्ट व वीजा नहीं मिल रहा जिस कारण वे वापिस भारत नहीं आ पा रहे।

वापसी की कोशिश में नीलकमल
वहीं गांव सैन माजरा के इराक में फंसे नीलकमल के भाई कमल हंस ने बताया कि उनका भाई नीलकमल इराक गया हुआ है और बगदाद से लगभग 400 किलो मीटर दूरी पर स्थित एक शहर में ठीक ठाक है। जगदीश कुमार के अनुसार उनका बेटा अमित इराक काम के लिए सात महीने पहले गया था। वहां इराक की एक कंपनी में अमित वेल्डर का काम करता था। उनके अनुसार मंगलवार शाम को इराक में अमित से आखिरी बार बात हुई थी।  

मोदी से गुहार, हमारे बच्चे भारत लाओ-
इराक में फंसे युवकों के परिजनों ने अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है कि वे उनके बच्चों को सकुशल भारत वापसी करवाएं। उनके अनुसार अब उनकी आस केवल मोदी से ही है। परिजनों का कहना है कि मोदी एक प्रतिनिधिमंडल इराक भेजे हैं और वहां फंसे तमाम भारतीय को एक विमान में वापस भारत लेकर आएं। क्योंकि यहां उनके परिजनों अपने बच्चों के लिए तड़प रहे हैं।

इराक से आया पैगाम, सलामत है बेटा

विद्या देवी अपने बेटे की खैरियत की खबर के लिए तड़प रही थी। इराक से आ रही आतंकी हमले की खबर ने उसकी रातों की नींद उड़ा दी थी। वह किसी तरह अपने बेटे राजबीर की आवाज सुनने को तड़प रही थी। दो दिन बाद वीरवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे राजबीर ने अपने भाई संजय को फोन करके अपनी सलामती की खबर दी।

राजबीर ने बताया कि उसके साथ पंजाब के दो और युवक हैं और वह सब सुरक्षित हैं। चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है। गांव बस्तली के गरीब परिवार के युवक राजबीर (24) के पिता जीताराम व उनकी पत्नी विद्या देवी ने बेटे को करीब पांच माह पहले रोजगार के लिए इराक भेजा था।

उनकी मंशा थी की उनका बेटा विदेश से रुपये कमाकर परिवार का भरण पोषण करेगा और उनकी गरीबी के दिन लद जाएंगे। राजबीर ने इराक में जाकर एक कंपनी में काम भी शुरू कर दिया और घर पर रुपये भेजने शुरू कर दिए, लेकिन इराक में चल रहे सुन्नी आतंकियों के हमले ने राजबीर के परिजनों की नींद उड़ा दी।

इराक में हो रहे आतंकी हमलों के कारण राजबीर से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा था। वह चिंतित थे। वीरवार को राजबीर ने उन्हें फोन करके अपने सकुशल होने की जानकारी दी। राजबीर के भाई संजय ने बताया कि राजबीर ने उन्हें फोन करके ठीक ठाक होने व आतंकी हमले से करीब 150 किलोमीटर दूर होने की बात कही है, लेकिन उसके बाद परिजनों की बात नहीं हो पाई।

अपने घर में सूखी रोटी खा लेंगे
एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजबीर का परिवार मेहनत मजदूरी कर पेट पालता है। उनके परिवार में तीन भाई और एक बहन है। जिसमें राजबीर तीसरे नंबर पर है। राजबीर की मां का कहना है कि राजबीर से पहले करनाल व हिमाचल के दो युवक भी इराक स्थित उसके साथ कंपनी में काम करते थे। विद्या देवी ने कहा कि वह बेटे को इराक से वापस बुला लेगी। उसे बेटा चाहिए। यहां रहकर वह जो भी कमाएंगे उसी में गुजारा कर लेंगे।

नहीं है पुलिस के पास कोई सूचना
निसिंग थाने के कार्यकारी प्रभारी एसआई बलबीर सिंह ने बताया कि अभी तक थाने में इस मामले में कोई सूचना नहीं पहुंची है। यदि विभाग की ओर से कोई सूचना मांगी जाएगी तो रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

यमुनानगर के सात लोग शामिल

इराक में सुन्नी आतंकियों के संघर्ष से जूझ रहे भारतीयों में यमुनानगर के सात लोग शामिल हैं। इनमें दो रादौर के फतेहगढ़ व खजूरी से, दो बाल छप्पर, एक छछरौली व दो बिलासपुर के हैं।

चिंतित परिजन हर वक्त मोबाइल पर इराक गए जिगर के टुकड़ों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। सुबह से शाम और फिर रातभर तक परिवार के लोग टीवी पर इराक से संबंधित समाचार देखकर अपनों के लौटने की दुआएं कर रहे हैं।

रादौर के गांव फतेहगढ़ से संदीप सैनी और गांव खजूरी (नागल) से विक्रमपाल लगभग 70-80 युवकों के साथ स्टेडियम के अंदर तीन दिनों से बंद हैं। पत्रकारों ने बसरा शहर के स्टेडियम में बंद संदीप सैनी से उसके मोबाइल पर बात की। संदीप सैनी ने बताया कि वह तीन माह पहले भारत से इराक की एक कंपनी में निर्माण का कार्य करने के लिए लगभग 85 भारतीय लोगों के साथ इराक के बसरा शहर में आया था।

तीन दिन पहले स्टेडियम के बाहर आईएसआईएस के आतंकियों ने अचानक हमला कर दिया। बीच पिछले तीन दिनों से सेना के साथ गोलीबारी चल रही हैं। कंपनी के अधिकारी उन्हें छोड़कर भाग चुके हैं। गोलीबारी शुरू होने के बाद उन्होंने स्टेडियम के दरवाजे बंद कर दिए हैं। संदीप सैनी ने बताया कि उनके साथ जठलाना के पास के गांव खजूरी का युवक विक्रमपाल भी उसके साथ ही है, जो उसके साथ कंपनी में काम करता है।

संदीप के मुताबिक जिस कंपनी के अंडर वह काम कर हैं, उसने तीन माह से उन्हें वेतन नहीं दिया और उनके पास भारत वापस लौटते के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। संदीप के चंडीगढ़ निवासी भाई सुनील सैनी ने बताया कि वह और परिवार के अन्य लोग भाई के वापस भारत लौटने की दुआ कर रहे हैं।

बिलासपुर के दो लोग
बिलासपुर। इराक में चल रहे खूनी संघर्ष के बीच बिलासपुर के सैनी मोहल्ला निवासी पवन कुमार भी फंसा है। पत्नी और बच्चे चिंता में डूबे हैं। पवन लगभग दस माह पूर्व इराक में रोजगार की तलाश में गए थे। पत्नी वीना ने बताया कि उनके पति इराक के शहर नजफ में जीएमएस कंपनी में कार्य करते हैं।

वीना ने बताया कि उसकी पवन से फोन पर बात हुई थी, जिसमें पवन ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने कंपनी में नौकरी से रिजाइन कर दिया है। कंपनी जैसे ही वापसी का टिकट जारी करेगी वह साथियों के साथ वापस भारत आ जाएगा। यही स्थिति बिलासपुर के गांव रामपुर से गए निर्मल कुमार के परिजनों का है। परिजन टीवी और इंटरनेट से जानकारी जुटा रहे हैं।

कंवरपाल के घर गम का माहौल
छछरौली। इराक में हिंसा को देख छछरौली के हाफिजपुर निवासी कंवरपाल के घर पर गम का माहौल है। कंवरपाल एक वर्ष से इराक में किसी कंपनी में काम करने गया हुआ है। परिजनों के मुताबिक सप्ताह में एक बार कंवरपाल से फोन पर बात हो जाती है लेकिन इराक में भड़की शिया-सुन्नी की लड़ाई के कारण परिवार काफी चिंतित है। उन्होंने बताया कि यहां माहौल बहुत खराब है। रोजाना कत्लेआम जारी है। यह देखकर दिल घबराया हुआ है।

कुरुक्षेत्र के 6 युवक इराक में फंसे, 6 सुरक्षित

इराक संकट में फंसे छह लोगों के परिजनों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। यहां के सात ऐसे युवक हैं, जो इस समय इराक में फंसे हैं। हालांकि इनमें से पांच के सुरक्षित होने का समाचार इनके घर पहुंच चुका है, ये पांचों जिला के गांव बीड़ बड़तौली चट्टानपुर के निवासी हैं, इनमें से एक पूर्व सरपंच का भतीजा है, जबकि अन्य चार गांव के पूर्व ग्राम पंचों के पुत्र हैं। खैर, इराक में इनके सुरक्षित होने का समाचार आज ही परिवार वालों को मिला तो खुशी के मारे इनकी आंखों में आंसू छलक आए।

सबसे ज्यादा सदमे में मिर्जापुर निवासी रामदेवी है, उनके कलेजा का टुकड़ा 23 वर्षीय संदीप का कोई सुराग नहीं लगा। संदीप की विधवा मां रामदेवी इराक के हालातों से अवगत है, क्योंकि टीवी और अखबार में लगातार जो खबरें में मिल रही हैं, उससे उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंची है। संदीप के पिता हरबंस प्रजापति की 11 साल पहले मृत्यु हो गई थी, उसके बाद की जिम्मेदारी रामदेवी के कंधों पर थी, लेकिन संदीप ने इस जिम्मेदारी को उठाना शुरू किया और पिछले चार साल से इराक की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़ा था।

संदीप के छोटे भाई सुरेंद्र का कहना है कि इराक जाने के बाद उसके फोन आते रहते थे, लेकिन पिछले 14 दिन से उनके भाई का कोई अतापता नहीं है। इराक में जिस नंबर से संदीप फोन करता था, उससे भी कोई संपर्क नहीं हो रहा है। आईटीआई छात्र सुरेंद्र का कहना है कि आखिरी बार फोन पर हुई बातचीत में संदीप ने बताया था कि वह एक माह पहले नौकरी छोड़ चुका है और जल्द आ जाएगा।

फोन आने से पहुंची राहत
कुरुक्षेत्र के गांव बीड़ बड़तौली चट्टानपुर के पूर्व सरपंच के भतीजा प्रमोद सैनी, पूर्व पंच शेर सिंह का भतीजा पवन सैनी, पूर्व महिला पंच का पुत्र जसबीर सैनी सिंह, पूर्व पंच ज्ञान चंद के पुत्र विनोद सैनी सहित पूर्व पंच जयपाल के पुत्र सुखवंत सिंह सैनी शामिल हैं। प्रमोद के बड़े भाई भूपेंद्र सिंह ने बताया कि  इराक में हुए घटनाक्रम से उनके गांव वासी चिंता में डूबे थे, क्योंकि उनके भाई सहित गांव के  अन्य चार युवकों से संपर्क नहीं हो रहा था, लेकिन वीरवार सुबह उनका फोन आने के बाद वे थोड़ी चिंता कम हुई।

प्रशासनिक स्तर पर देंगे सहयोग : एसडीएम
एसडीएम धर्मवीर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि प्रशासनिक स्तर पर सभी इराक में फंसे कुरुक्षेत्र के लोगों की सूची तैयार की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर उन्हें जो भी सहयोग हो सकेगा किया जाएगा। इसके लिए सरकारी कर्मचारी इन लोगों के परिवार के सदस्यों से भी मिल रहे हैं।
विज्ञापन

अभी तो खैर है लेकिन खतरे से कांपते हैं

इराक में हो रहे आतंकी हमलों के बीच जिले के सात युवक फंस गए हैं। इनमें राजौंद के सेरहधा का दीपक, सीवन के गांव कक्योर माजरा का मस्तान सिंह (35) पुत्र अवतार सिंह, भूना गांव का बलजिंदर सिंह पुत्र बलदेव सिंह, कलायत के गांव मटौर निवासी राजेश और प्रदीप, गांव खरक का कुलदीप शामिल है। इन युवकों के परिजन अपने लाडलों के सुरक्षित भारत लौटने के लिए दुआ मांग रहे हैं।

दीपक के परिजनों ने बताया कि उनका बेटा वहां के हालात की पल-पल की जानकारी फोन के माध्यम से दे रहा है। बेटे ने बताया कि वह खतरे में है। दीपक के पिता महेंद्र सिंह ने बताया की 5 दिसंबर, 2013 को उनका बेटा इराक गया था, वह वहां प्लम्बर का काम करता है। दीपक ने फोन पर बताया है कि वहां का प्रशासन उनकी मदद नहीं कर रहा है। दीपक की माता राजबाला व छोटे भाई पवन कुमार ने कहा कि वे गरीबी में ही खुश हैं, बस दीपक सही सलामत घर आ जाए। उसे कर्ज लेकर उसे विदेश भेजा था। हालात इस तरह बिगड़ जाएंगे, यह सोचा नहीं था

मस्तान के पिता अवतार सिंह ने बताया कि उनका बेटा चंडीगढ़ की एक कंपनी ईरानी लाइट के माध्यम से इराक गया था।  बसरा शहर में उसे काम मिला था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने मस्तान का पासपोर्ट छीन लिया है और उसे एक तरह से बंधक बनाकर रखा है। इस बारे में प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम जानकारी दे दी है। बेटे के जल्द घर लौटने की दुआ मांग रहे हैं।

दूसरी तरफ बलजिंदर सिंह के भाई बलजीत सिंह ने बताया कि बलजिंदर आठ महीने पहले इराक गया था और वहां पर मिस्त्री का काम करता था। उन्होंने बताया कि उसके भाई को एक कंपनी के कर्मचारियों ने कथित रूप से बंधक बना लिया है। चार दिन पहले उससे फोन पर बात हुई थी, तब उसने बताया था कि इराक में बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने अब तक उनकी सुध नहीं ली है।

राजेश के भाई बलविंदर ने बताया कि उसका भाई राजेश और गांव का ही प्रदीप करीब पांच साल पहले इराक गए थे। अमेरिका की एक कंपनी में राजेश जेसीबी चलाता है तथा प्रदीप मेंस में कुक का काम करता है। वे आजकल अमेरिकी सैनिकों की कस्टडी में हैं। प्रदीप के पिता ईश्वर ने बताया कि प्रदीप का फोन आया था तथा वह अपने आप को ठीक बता रहा था लेकिन परिवार को चिंता सता रही है। वहीं कुलदीप के भाई सत्यवान ने बताया कि उसका भाई एक वर्ष पूर्व गया था। वह इराक के नजब शहर में स्टील की फैक्टरी में कार्य करता है जो घटनास्थल से करीब छह सौ किलोमीटर दूर है। वीरवार को फोन पर हुई बातचीत में उसने  सकुशल होने की बात कही थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें