पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए पंजाब सरकार ने आखिरकार सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में तीन साल पहले 9 आईपीआरओ और 18 एपीआरओ (कुल 27 पद) के पद पर हुई नियुक्तियों को रद कर नए सिरे से नियुक्ति पत्र जारी कर दिए हैं।
नए सिरे से हुई नियुक्तियों के चलते पहले वाले 6 एपीआरओ को नौकरी गंवानी पड़ी है। उनकी जगह नए लोगों को नियुक्ति मिली है। वहीं, पहले आईपीआरओ नियुक्त हुए दो उम्मीदवारों को नई मेरिट सूची के मुताबिक एपीआरओ लगा दिया गया है। इस तरह पहले नियुक्त दो एपीआरओ, अब आईपीआरओ प्रमोट हो गए हैं।
राज्य सरकार ने पिछली नियुक्तियों को रद कर और नई नियुक्ति प्रदान करने की सारी प्रक्रिया सोमवार को पूरी की। अप्रैल 2011 में इन पदों पर हुई नियुक्तियों को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया था कि मेरिट सूची बनाते वक्त ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित उम्मीदवारों के लिए 5 अंक अलग से जोड़ दिए गए हैं, जिनके बारे में संबंधित विज्ञापन में जिक्र नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश जारी किए थे कि उक्त पांच अंक हटाकर नए सिरे से मेरिट सूची तैयार की जाए और उसी आधार पर नियुक्तियां हों।
राज्य सरकार द्वारा अब नए सिरे से कई गई नियुक्तियां चयनित उम्मीदवारों की ज्वाइनिंग की तिथि से लागू मानी जाएंगी। इस प्रकार जहां नौकरी गंवाने वालों के तीन साल का सेवाकाल व्यर्थ गया, वहीं जिनकी नियुक्ति बरकरार रह गई, उन्हें भी बीते समय का कोई फायदा नहीं मिल सकेगा।
नवनियुक्त अधिकारियों को ऑफर लेटर जारी करते हुए सेक्टर-34 स्थित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मुख्यालय में बुधवार को रिपोर्ट करने को कहा गया है। यहां उन्हें मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए लेटर जारी किए जाएंगे। मेडिकल के बाद इन अधिकारियों की ज्वाइनिंग होगी।
इसके लिए 15 दिन का समय दिया गया है। जिन छह नए उम्मीदवारों को एपीआरओ के रूप में मेरिट सूची में जगह मिली है, उनमें हरमीत सिंह ढिल्लों, भूपेश चट्ठा, मेघा मान, पुनीत गिल, गगनीत औजला तथा बलविंदर कुमार शामिल हैं।
कोट्स
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार नियुक्तियों से संबंधित प्रक्रिया पूरी करते हुए नवनियुक्तों को ऑफर लेटर जारी कर दिए गए हैं।
एनएस कंग, प्रमुख सचिव, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग
नौकरी गंवाने वाले कोर्ट जाने की तैयारी में
पता चला है कि नए सिरे से नियुक्तियों के कारण जिन छह एपीआरओ को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका मानना है कि उनकी तीन साल की सर्विस पूरी हो चुकी थी और प्रोबेशन पीरियड समाप्त हो चुका था। इससे भी बढ़कर जिस वक्त उन्हें नियुक्ति मिली थी, तब वह अलग-अलग अखबारों या अन्य स्थानों पर नौकरियां कर रहे थे। अब उनके लिए नई नौकरी ढूंढना मुश्किल होगा।