पीजीआई में जिंदा नवजात के पोस्टमार्टम मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई। पीजीआई के डीन एकेडमी डॉ. अरविंद राजवंशी के नेतृत्व में गठित 6 डॉक्टरों की कमेटी को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने जांच कर जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई तय होगी।
पीजीआई के गाइनी विभाग से 26 दिसंबर को एक एमटीपी केस में 24 हफ्ते के जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। पोस्टमार्टम हाउस में जिंदा नवजात को देखकर कर्मचारियों ने वापस विभाग को भेज दिया था, जहां चंद घंटों के बाद उसकी मौत हो गई थी। मामला सामने आने पर पीजीआई ने आनन-फानन में जांच कमेटी गठित की है।
दूसरी ओर, पीजीआई इंप्लाइज यूनियन नॉन फैकेल्टी ने इस घटना को लेकर प्रशासन पर पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। यूनियन के अध्यक्ष अश्वनी मुंजाल ने एमएस ऑफिस के तीन डॉक्टरों पर पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शुक्रवार की सुबह एमएस ऑफिस के तीन डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम हाउस में जाकर कर्मचारियों को डराया-धमकाया और सेवा समाप्त करने तक की चेतावनी दी।
वहीं, पीजीआई प्रशासन इस घटना को चूक मानते हुए जांच का आदेश दे चुका है। 26 दिसंबर की घटना पर दो जनवरी तक कोई कार्रवाई न होना बेहद दुखद और असंवेदनशील है। कर्मचारियों को डराए जाने की बात सामने आने से कर्मचारी यूनियन के सदस्यों रोष में हैं। उन तीनों डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग करते हुए इस संबंध में पीजीआई प्रशासन से लिखित शिकायत की गई है, जबकि पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि इस मामले को लेकर कर्मचारियों को डराने या उससे संबंधित लिखित शिकायत करने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।