फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गजब की खोजः अब गोबर के गमले में उगेगी पनीरी, पर्यावरण संरक्षण में मिलेगा सहयोग

Mon, 26 Nov 2018 03:50 PM IST
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पर्यावरण संरक्षण
विज्ञापन
चंडीगढ़ सेक्टर-45 की गोशाला में गोमूत्र अर्क प्लांट, गोबर के ब्लाक्स (डंडे), गोबर के दीये के बाद अब गोबर से गमला तैयार करने पर काम चल रहा है। इसे तैयार कर ट्रायल शुरू है। इसके लिए बाकायदा मशीन भी आ चुकी है। अभी 50 गमले तैयार किए गए हैं। इन गमलों में तुलसी के पौधे लगाकर इसका ट्रायल हो रहा है कि ये कितना पानी सह सकते हैं। यह गमला पानी में खराब तो नहीं होगा। इससे गोबर का सही प्रयोग होना शुरू होगा।
विज्ञापन


गमलों में पौधों की पनीरी तैयार की जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही गोबर की गंदगी से छुटकारा मिलेगा। ऐसे गमलों में खाद की कमी महसूस नहीं होगी। ट्रायल सफल होने पर गमलों का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। इससे प्लास्टिक बैग का प्रयोग नहीं होगा। पनीरी तैयार होने पर इस गोबर के गमले के साथ ही पौधे को गमला में शिफ्ट कर दिया जाएगा। गोबर के साथ मिट्टी, लकड़ी के बुरादे, तुरी और नीम की लकड़ी के बुरादे का प्रयोग किया गया है।

नीम के लकड़ी के बुरादे के प्रयोग से पौधों में कीड़े नहीं लग पाएंगे। सेक्टर-45 की गोशाला में 950 से अधिक गोवंश हैं। इनमें से पांच सौ से अधिक गायें, साढ़े तीन सौ से भी अधिक नंदी और 88 से भी अधिक बछड़े हैं। नगर निगम ने 2013 में गौरी शंकर सेवादल को इस गोशाला को चलाने को दिया है। गौरी शंकर सेवादल समय समय पर धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है। हर संडे को पीजीआई में लंगर की सेवा के अलावा वर्ष में एक बार एक महीने तक बाबा केदारनाथ के भक्तों के लिए सोनप्रयाग में लंगर लगाती है।
विज्ञापन


गोबर से गमले तैयार किए जा रहे हैं। अभी यह ट्रायल पर है। कुछ गमले तैयार किए गए हैं। उसका रखरखाव किस प्रकार हो इसका ट्रायल हो रहा है। ट्रायल पूरा होने पर बड़े स्तर पर गमलों का उत्पादन शुरू किया जाएगा। इस काम में हमारी पूरी टीम सहयोग कर रही है।
विज्ञापन

- रमेश कुमार निक्कू, अध्यक्ष, गौरी शंकर सेवादल चंडीगढ़

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें