यहां आरोपी एक बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। आरोपियों ने आठ कर्मचारियों को भी रखा हुआ था। मृणाल शर्मा और अलोक कुमार गिरोह के मास्टरमाइंड हैं। आरोपी गरीब लोगों को चार से पांच हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम ले लेते थे और रोजाना एक सिम का इस्तेमाल कर उसे बंद कर देते थे। वहीं पंकज और अरुण त्यागी आरोपियों को बैंक खाते उपलब्ध करवाते थे। इसके लिए उन्हें 5 हजार रुपये मिलते थे। पुलिस ने बताया कि पंकज के खुद के नाम पर छह बैंक खाते हैं।
रोजाना 800 से एक हजार लोगों को करते थे कॉल, पांच से सात लोग बनते थे शिकार
साइबर सेल के एसपी केतन बंसल ने बताया कि आरोपी रोजाना 800 से एक हजार लोगों को कॉल करते थे। इस दौरान पांच से सात लोग आरोपियों के झांसे में आकर रुपये दे देते थे। आरोपी एक व्यक्ति से 12 हजार से लेकर 90 हजार रुपये तक की ठग कर लेते थे।
लोगों को झांसे में लेने के लिए मृणाल अंग्रेेजी में बात करता था। वह अच्छा पढ़ा लिखा है। केतन बंसल ने बताया कि आरोपियों ने फेक आईडी से शाइन डॉट कॉम से 40 हजार रुपये में डाटा खरीदा था। डाटे में उन्हें उन लोगों की नाम और मोबाइल नंबर मिले, जिन्होंने नौकरी के लिए अप्लाई कर रखा था। आरोपी नौकरी डॉट कॉम के अलावा शाइन डॉट कॉम और मान्स्टर डॉट कॉम पर भी नजर रखते थे।
रामदरबार निवासी युवती से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे थे 90 हजार
रामदरबार निवासी युवती पिंकल धीमान ने नौकरी डॉट कॉम पर पंजीकरण कराया था। उसे एक शख्स का फोन आया जिसने कहा कि वह बैंक में उसकी नौकरी लगवा देगा। पिंकल झांसे में आ गई। इसके बाद आरोपी ने कभी एडवांस फीस, कभी सत्यापन तो कभी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के नाम पर पैसे लिए। इस तरह युवती से 90 हजार 610 रुपये की ठगी की गई।
इसके बाद भी आरोपी और पैसे मांगते रहे लेकिन युवती को अहसास हो गया था कि उसके साथ ठगी हुई है। इसके बाद आरोपियों ने मोबाइल बंद कर दिया। बाद में पिंकल ने पुलिस को शिकायत दी। साइबर सेल थाने ने 29 अगस्त को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।