कचरा उठातीं विश्वदित्ती और महिलाओं को जागरूक करते विक्रांत।
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चंडीगढ़ के युवा अब सिटी ब्यूटीफुल को एक नई दिशा देना चाहते हैं। उन्होंने दुनिया में प्लास्टिक की बढ़ती समस्या को लेकर न केवल स्वयं बल्कि लोगों को इसके दुष्परिणाम बताना शुरू किया है। वहीं लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उसे दिलाने में भी युवा काफी रुचि ले रहे हैं। भागदौड़ भरे इस समय में बुजुर्गों की मदद करना और प्रकृति संरक्षण के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ना नई पीढ़ी के लिए जैसे बढ़ते पौधे के जैसा है जो भविष्य में मीठे फल देगा। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर चंडीगढ़ के कुछ युवाओं से अमर उजाला ने बात की और उनके लक्ष्य के बारे में जाना।
विश्वदित्ती ने पांच माह में इकट्ठा कर दिया 4000 टन प्लास्टिक व इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट
सेक्टर-38 निवासी विश्वदित्ती बीए दूसरे वर्ष की छात्रा हैं। महज 19 साल में विश्वदित्ती को पर्यावरण के प्रति ऐसा लगाव है कि उन्होंने पांच माह में शहर के अलग अलग भाग से 4000 टन प्लास्टिक व इलेक्ट्रॉनिक कचरा इकट्ठा कर निस्तारण के लिए भेज दिया। विश्वदित्ती ने बताया कि मार्च 2022 में केंद्र सरकार की ओर से उनकी टीम को यह काम सौंपा गया। छह माह के लिए मिले इस काम में उन्होंने सबसे पहले स्कूल व कॉलेजों में संपर्क किया। प्रोजेक्ट डायरेक्टर विश्वदित्ती ने बताया कि लगभग 50 स्कूलों में उन्होंने दो-दो ग्रीन एंबेसडर बनाए। इनका काम था कि अपना एक कचरा संग्रहण केंद्र बनाएं और वहां प्लास्टिक व इलेक्ट्रॉनिक कचरा इकट्ठा करें। इस काम में इतनी सफलता मिली कि अब इसे आगे भी जारी रखेंगे। विश्वदित्ती ने बताया कि उनकी टीम में पांच सदस्य हैं और 100 ग्रीन एंबेसडर हैं जो इस काम को अंजाम दे रहे हैं। विश्वदित्ती युवाओं को पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी टीम के साथ लगातार जागरूक कर रहीं हैं।
महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के लिए लड़ रहे विक्रांत
इसी साल अपनी एलएलबी पूरी कर चुके सेक्टर-24 निवासी विक्रांत महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के प्रति लड़ने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं। विक्रांत ने हाल ही में 50 ऐसी महिलाओं को बेकरी का प्रशिक्षण कोर्स कराया है जो आत्मनिर्भर तो बनना चाहती थीं लेकिन आर्थिक समस्या और अशिक्षा उनके आड़े आ रही थी। इन महिलाओं का प्रशिक्षण पूरा हो गया है और अब जल्द इनके लिए रेस्टोरेंट खोलने जा रहा है। विक्रांत ने बताया कि अधिकारों की जानकारी के अभाव में कई महिलाएं शोषण का शिकार हो जाती हैं। कुछ ऐसी घटनाओं ने उन्हें एलएलबी करने के लिए प्रेरित किया। जिला अदालत में उन्होंने प्रैक्टिस शुरू कर दी है। महिलाओं से जुड़े मामलों में काउंसलिंग और उनके साल कुछ गलत होता है उस केस को स्वयं गंभीरता के साथ देखते हैं ताकि एलएलबी करने का मकसद पूरा हो सके।
राष्ट्रीय पदक विजेता हरचरण तैयार कर रहे युवाओं की पौध
स्वयं को परिपक्व बनाना आसान है, लेकिन अपने जैसी नई पौध तैयार करना उससे भी बड़ा काम है। इस ध्येय वाक्य को लेकर चलने वाले हरचरण सिंह ने स्वयं के सपनों को आने वाली पीढ़ी में देखा है। सेक्टर-22 की डिस्पेंसरी में योगा थेरेपिस्ट के पद पर कार्यरत हरचरण सिंह जेवलिन थ्रो के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने चार बार राष्ट्रीय पदक भी जीते हैं लेकिन टेनिस एल्बो के कारण उनके कॅरिअर में थोड़ी बाधाएं आ गईं। ओलंपिक तक जाने का सपना अब हरचरण शहर की नई पौध में देखते हैं। वे शहर के अलग अलग स्कूल में जाकर खेल में रुचि रखने वाले बच्चों के बारे में पूछते हैं। उसके बाद सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद उन्हें खेल का प्रशिक्षण देते हैं। यही कारण है कि इसी महीने सेक्टर-7 में जेवलिन थ्रो प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। इसमें हरचरण के प्रशिक्षित 60 बच्चों को हिस्सा लिया। इनमें से 10 बच्चों ने मेडल हासिल किए। हरचरण सिंह ने युवाओं का अब एक ग्रुप भी बनाया है जो जरूरतमंद खिलाड़ियों की मदद कर उन्हें खेल में प्रशिक्षण के लिए मदद करता है।
युवा पीढ़ी समझे बुजुर्गों का महत्व, उनकी सहायता के लिए रहते हैं तत्पर
नई पीढ़ी आज के दौर में काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में सामूहिक परिवार और बुजुर्गों का महत्व शायद कम होता दिख रहा है इसलिए हमारा उद्देय रहता है कि शहर में अकेले रह रहे बुजुर्गों को समझें और उनकी मदद करें। यह कहना है सेक्टर-32 निवासी गोविंद आर्य का। गोविंद बीए दूसरे वर्ष के छात्र हैं और अपनी संस्था के साथ मिलकर शहर के बुजुर्गों के लिए काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह अपनी टीम के साथ घर घर सर्वे करते हैं। उसके बाद बुजुर्गों से बात करके जो दस्तावेज नहीं बने होते हैं उसके लिए एक शिविर का आयोजन करते हैं। उस शिविर में उनके दस्तावेजों को पूरा करवाते हैं। मौके पर हम क्षेत्रीय पार्षद को भी बुलाते हैं ताकि वेरिफिकेशन के लिए समस्या न हो। इसके साथ ही गोबिंद ने बताया कि वह पर्यावरण प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अलग अलग जागरूकता कैंप लगाते हैं। प्लास्टिक मुक्त शहर बनाने के लिए वह और उनकी टीम लगातार कार्यक्रम आयोजित कर रही है।