फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

International Youth Day: बुलंद इरादों से 'फतेह' किया मैदान और लिखी नई इबारत, 10 कहानियां

Wed, 12 Aug 2020 12:14 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 11
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
ये कहानियां उन युवाओं की हैं, जिन्होंने चुनौतियों और मुश्किलों को मात देकर कामयाबी की नई इबारत लिखी। शिक्षा का क्षेत्र हो या विज्ञान का। खेल का मैदान हो राजनीति की पिच। इन्होंने अपनी काबिलियत को न केवल साबित किया बल्कि युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की। मुसीबतों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया।

न हालातों का रोना रोया। परेशानी जितना विकराल रूप लेकर आई, ये उतनी ही मजबूती से उसके सामने टिके रहे। बुलंद इरादों से इन्होंने हर मैदान फतेह किया। आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर अमर उजाला आपको ऐसे ही युवाओं से रूबरू करा रहा है। इनकी कहानियां आपमें नई ऊर्जा का संचार करेंगी।
विज्ञापन

2 of 11
फूड कोर्ट खोलने वाले अमित - फोटो : अमर उजाला
अमित करना चाहते थे कुछ अलग, खोला अंतरराष्ट्रीय फूड कोर्ट
युवाओं के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं अमित। फाइनेंस में एमबीए करने के बाद उन्हें कई नौकरियों के ऑफर मिले, लेकिन वह खुद का काम करना चाहते थे इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का एक फूड कोर्ट खोल दिया। अपनी मेहनत के बल पर आज उनका फूड कोर्ट किसी परिचय का मोहताज नहीं है।

सेक्टर-8 में उनके द एग कंपनी वर्ल्ड कैफे में अंडे से बने विभिन्न व्यंजन उपलब्ध हैं, जिन्हें खाने के लिए सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि ट्राइसिटी समेत हरियाणा, पंजाब व हिमाचल के लोग आते हैं। चंडीगढ़ के लेक अपार्टमेंट निवासी 32 वर्षीय अमित मूलरूप से पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले हैं। पिता श्रीचरण दास पेशे से डॉक्टर हैं, वह फिरोजपुर में ही खेती का कार्य देखने के साथ निजी प्रेक्टिस करते हैं।

पिता की इच्छा थी कि बेटा भी उन्हीं की तरह डॉक्टर बने लेकिन अमित ने कारोबार में अपना रास्ता चुना। अब अमित जल्द अपना ही एक ब्रांड बाजार में लाने वाले हैं। अमित ने बताया कि पापा चाहते थे कि वह घर में रहकर ही नौकरी के साथ ही खेती का काम देखें, लेकिन मुझे बचपन से कुछ अपना और अलग करना था। इसलिए फूड कैफे की ओर मुड़ गया।
विज्ञापन

3 of 11
प्रोफेसर गौरव - फोटो : अमर उजाला
प्रो. गौरव ने उठाया महामारी में महिलाओं को बीमारी मुक्त रखने का बीड़ा
पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क के युवा प्रोफेसर गौरव ने महिलाओं को महामारी के दौरान अस्वच्छता से होने वाली बीमारियों से मुक्त रखने को अपना लक्ष्य बना रखा है। वह अपने विद्यार्थियों के साथ मिलकर ट्राइसिटी के स्कूल, कॉलेज और स्लम एरिया में लड़कियों और महिलाओं को महामारी में स्वच्छता के महत्व से जुड़ी भ्रांतियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

प्रो. गौरव ने बताया जब भी कोई आपदा आती है तो महिलाएं मासिक धर्म को अनदेखा कर परिवार की देखभाल को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। प्रो. गौरव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पीयू में काम करने वाले 270 मजदूरों को खाना मुहैया करवाने के साथ महिलाओं व युवतियों को सैनेटरी किट भी बांटी।

एसडीएम नाजुक कुमार की अपील के बाद उनकी टीम ने धनास कच्ची कॉलोनी में लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाए। उन्होंने बताया कि अब उनकी टीम री-यूज होने वाले पैड को प्रमोट कर रही है। इस कार्य में एमए सोशल वर्क की पूरी क्लास उनकी मदद करती है।

4 of 11
गौरी श्योराण - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्य को साधकर अंतरराष्ट्रीय शूटर बनीं गौरी श्योराण
अंतरराष्ट्रीय शूटर गौरी श्योराण इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चंडीगढ़ के साथ भारत का नाम विदेश में रोशन करती आ रहीं हैं। इस मुकाम तक पहुंचने में सिर्फ उनकी मेहनत ही काम आई। गौरी ने जब शूटिंग करनी शुरू की तो इस खेल में कई बेहतरीन खिलाड़ी उनके सामने थे।

उनका लक्ष्य शीर्ष महिला शूटर्स की लिस्ट में शामिल होना था। इसके लिए उन्होंने कई घंटे मेहनत की। दिन, महीने और साल लगातार शूटिंग का अभ्यास करती रहीं। जीतोड़ मेहनत का परिणाम रहा कि उनकी झोली में खूब सारे मेडल आने लगे। गौरी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल शूटिंग की चैंपियन बनीं।

आज गौरी श्योराण का नाम देश की टॉप 10 महिला शूटिंग खिलाड़ियों की लिस्ट में शुमार हैं। बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर गौरी को स्विट्जरलैंड में एक समारोह में इंटरनेशनल वुमन क्लब की अध्यक्ष मिशेल बोउलाडे की ओर से सम्मानित किया गया। गौरी कोविड-19 में लोगों की मदद के लिए पीएम फंड में पैसे भी दे चुकी हैं।
विज्ञापन

5 of 11
काश्वी गौतम - फोटो : अमर उजाला
वनडे मैच में अकेले दस विकेट लेकर काश्वी ने रचा इतिहास
सामान्य सी दिखने वालीं काश्वी गौतम उस समय दुनिया की निगाहों में छा गईं, जब उन्होंने वनडे मैच की एक ही पारी में दस विकेट झटक लिए। बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद वुमन अंडर-19 वनडे ट्राफी में चंडीगढ़ की टीम से खेलते हुए काश्वी गौतम ने अरुणाचल प्रदेश की टीम के सभी 10 खिलाड़ियों को आउट कर इतिहास रच दिया था।

वह वनडे मैच में अकेले दस विकेट लेने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काश्वी गौतम ने कड़ी मेहनत की है और जमकर अभ्यास किया है। उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि अभ्यास के लिए जब लड़कियां नहीं होती थीं तो वह लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करतीं थीं।

उनका हेयर स्टाइल भी लड़कों जैसा है, ऐसे में लड़के उन्हें लड़का ही समझते रहे। जब वह क्रिकेट की दुनिया में छाईं तो उनकी फोटो देखकर वह लड़के भी दंग रह गए, जो उनके साथ खेला करते थे। काश्वी गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-26 में 12वीं की छात्रा हैं।
विज्ञापन

6 of 11
उपेंद्र मौर्य - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए खड़ा किया ‘स्तंभ’
सेक्टर-26 स्थित बापूधाम को कंटेनमेंट जोन घोषित करने की वजह से वहां के कई परिवारों की आर्थिक दशा खराब हो गई थी। बापूधाम के कई इलाकों में सिर्फ दिहाड़ीदार मजदूर रहते हैं, उनके सामने खाने का संकट खड़ा हो गया। इस स्थिति से उन्हें बाहर निकालने का जिम्मा बापूधाम के कुछ युवाओं ने उठाया। बापूधाम के इन युवाओं ने एक टीम बनाई और कंटेनमेंट जोन में करीब 75 परिवारों तक राशन पहुंचाया। युवाओं की टीम में सबसे आगे रहे उपेंद्र मौर्य, जो बापूधाम में ही युवा स्तंभ एनजीओ भी चलाते हैं।

इन युवाओं ने बताया कि बापूधाम को प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया लेकिन अधिकारियों ने यह नहीं सोचा कि यहां पर दिहाड़ीदार मजदूर ज्यादा रहते हैं। काम धंधे बंद हो जाएंगे तो वह खाएंगे क्या। कुछ दिनों बाद यही संकट बापूधाम के कई परिवारों के सामने खड़ा हो गया। उपेंद्र ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपने पड़ोस के एक परिवार की मदद अपनी जेब से की, जो किराए पर रहते थे। इसके बाद जब उन्होंने पता किया तो जानकारी मिली कि बापूधाम में ऐसे दर्जनों परिवार हैं, जो बेहद जरूरतमंद है।

इसके बाद उन्होंने अनिल कुमार, विक्रम शाह, जफर खान आदि की मदद ली और फिर एक व्हॉट्सएप नंबर को बापूधाम में फैला दिया कि जिसे भी राशन की जरूरत हो वह उनसे संपर्क कर सकता है। इसके बाद उन्हें रोजाना कम से कम 5 कॉल्स आने लगीं। उपेंद्र ने कहा कि उनके पास पैसे खत्म हो चुके थे लेकिन लोगों की संख्या ज्यादा थी, इसलिए उन्होंने समाजसेवी असतिंदर कौर, एलके शर्मा, रवि ठाकुर, येंकी कालिया आदि की मदद ली। सभी के सहयोग से उन्होंने कुल करीब 75 परिवारों तक राशन पहुंचाया।
विज्ञापन

7 of 11
एडवोकेट मोहित शर्मा - फोटो : अमर उजाला
गरीबों को न्याय दिलाने के लिए मुफ्त में केस लड़ते हैं एडवोकेट मोहित शर्मा
कुछ लोग अपना लक्ष्य प्राप्त न कर पाने पर हार मान लेते हैं, लेकिन कई लोग चुनौतियों को पार करके भी खुद को साबित करते हैं। ऐसे ही एक अधिवक्ता हैं मोहित शर्मा। वह शुरू से सरकारी ऑफिसर बनकर लोगों की सेवा करना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने तैयारी भी की। उन्होंने परीक्षा तो पास कर ली लेकिन भर्ती रद्द हो गई।

इसके बाद वह कई साल तक जूझते रहे, लेकिन हार नहीं मानी। उसके बाद उन्होंने वकालत में दाखिल लिया और काला कोट पहन लिया। मोहित जिला अदालत के एडवोकेट हैं और गरीब लोगों के केस मुफ्त में लड़ते हैं। इसके अलावा वह मुफ्त में कानूनी सलाह भी देते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार ने उनको काफी सहयोग किया।

एक साल में वह लगभग 50 लोगों के मुफ्त में केस लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए। अच्छे इंसान के साथ हमेशा अच्छा होता है। उन्होंने बताया कि आज कल न्याय की लड़ाई लड़ना आसान नहीं है। इसीलिए उन्होंने यह रास्ता चुना और मकसद भी बना लिया है कि जो न्याय की लड़ाई नहीं पड़ पाएगा, उसकी लड़ाई खुद लड़ेंगे।

8 of 11
कॉन्सटेबल रामबीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में भूखे लोगों के लिए फरिश्ता बने कांस्टेबल रामबीर
लॉकडाउन के दौरान खाकी वर्दी में फरिश्ता बनकर यूटी पुलिस का एक कांस्टेबल दिनरात लोगों की सेवा में जुटा रहा। सेक्टर-19 में तैनात कांस्टेबल रामबीर सिंह ने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद लोगों को खाने और चने के पैकेट बांटकर उनकी सेवा की। साल 2011 बैच के रामबीर सिंह 29 मूल रूप से हरियाणा के पलवल जिले के गांव भेडूकी के रहने वाले हैं।

लॉकडाउन के दौरान उनकी ड्यूटी सेक्टर-22 स्थित पुलिस बीट बॉक्स में लगी थी। रामबीर बताते हैं कि ड्यूटी के दौरान वह अक्सर लोगों को भूखा-प्यासा देखते थे। कई लोग तो मार्केट में भूखे भी सो जाते थे। उन्हें देख मन में अजीब सा ख्याल आता था कि आखिरकार ऐसा कब तक चलेगा।

इसके बाद एक दिन उन्होंने 250 ग्राम वाले चने के करीब 100 पैकेट अपने पैसों से खरीदकर सेक्टर-22, सेक्टर-17, सेक्टर-23 समेत आसपास के मार्केट में बांट दिया। इससे उन्हें बेहद खुशी मिली। साथ ही ड्यूटी से छुट्टी के बाद जरूरतमंद लोगों को खाना भी बांटा। इसके अलावा रामबीर ने पीजीआई में दो बार रक्तदान भी किया है, जिससे जरूरतमंद लोगों तक उनका रक्त पहुंच सके।

9 of 11
नीतीश कुशवाहा - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में नीतीश ने भूखों को खाना खिलाकर ही किया भोजन
विद्यार्थी नीतीश कुशवाहा सेक्टर-42 स्थित डॉ अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कॉलेज चंडीगढ़ के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। कोरोना महामारी में लोगों की खूब सेवा की। स्वयं के पॉकेट खर्च और खुद के जमा किए गए पैसे जब खत्म हो गए तो अपने दोस्तों और पहचान के लोगों को भी अपने अभियान में शामिल कर लिया।

पता चलने पर कि किसी के घर में रोटी नहीं बनी है और लोग भूखे हैं तो वह उनको जब तक खाना नहीं खिला लिया या राशन का इंतजाम नहीं कर दिया तब तक नीतीश ने खाना नहीं खाया। कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब लोगों के काम छूट गए खासकर दिहाड़ीदार मजदूर और भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों को काफी परेशानी होने लगी तो उन्होंने उनकी काफी मदद की।

नीतीश कुशवाहा का कहना है कि मूलरूप से बिहार के मध्रुबनी से हैं। वह कहते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है कि एक इंसान खाना खाए और दूसरा भूखा रहे। मुझसे देखा नहीं गया और जितना बन सका मदद की। एक बात का उन्होंने खास ख्याल रखा कि मदद के दौरान किसी की फोटो नहीं खींची क्योंकि वह किसी की गरिमा को चोट नहीं पहुंचाना चाहते थे।  उनका कहना है कि उनके इस काम में यादव कल्याण सभा के कृपा सिंधु यादव ने खूब मदद की।

10 of 11
जीवा राज - फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी में अत्याचार देख जीवा ने छोड़ी नौकरी, लड़ रहे मजदूरों के हक की लड़ाई
सेक्टर-38 वेस्ट में रहने वाले 24 वर्षीय जीवा राज ने मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए अपनी अच्छी खासी नौकरी को भी ठोकर मार दी। उनसे अपनी फैक्टरी में मजदूरों पर अत्याचार होता देखा नहीं गया, इसलिए वह आज भी कई मजदूरों का केस लड़ रहे हैं और कइयों को इंसाफ दिला चुके हैं। जीवा राज ने चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से डिप्लोमा करने के बाद चंडीगढ़ की एक नामी कंपनी में ट्रेनिंग के दौरान जब मशीन पर काम कर रहे मजदूरों का शोषण होते देखा तो उनसे रहा नहीं गया।

उस वक्त ही उन्होंने फैसला किया कि वह मजदूरों के लिए ही आगे काम करेंगे। इसके बाद उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ खर्च चलाने के लिए पार्ट टाइम मार्केटिंग की नौकरी ज्वाइन की और सामाजिक कार्यों में जुट गए। अपनी पढ़ाई के दौरान मजदूरों के हितों में बने श्रम कानूनों के विपरीत मजदूरों के साथ होते शोषण का शिकार वह एक दिन खुद हुए और उसके बाद श्रम अदालत में लंबे समय तक चले अपने केस को जीता ही नहीं, बल्कि उस कंपनी में कार्य कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों को भी ईएसआई, ईपीएफ जैसी श्रम सुविधाओं का लाभ दिलाया।

उनके इन कामों ने कई राष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा और वह ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। वह अभी भी मजदूरों के हितों के आंदोलनों का हिस्सा हैं। जीवा राज ने बताया कि इस लॉकडाउन में जब लोगों को दिन लंबे लग रहे थे, उस समय भी वह कंस्ट्रक्शन, फैक्टरी मजदूरों को राशन पहुंचाने, रुकी हुई तनख्वाह के लिए अधिकारियों से संपर्क में लगे हुए थे और उन तक मदद भी पहुंचाई।
विज्ञापन

11 of 11
रितु रानी - फोटो : अमर उजाला
लड़कियों को सभी जगह खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
अगर लड़कियों को खेलने का मौका मिलता है तो वह इसे साबित करती हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान भारतीय महिला फुटबाल टीम की खिलाड़ी रितु रानी ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2019 में हुए साउथ एशियन गेम्स में फुटबाल में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनके अभिभावक खेती का काम करते हैं, लेकिन जब उसने खेलने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ भेदभाव अभी समाज में खत्म नहीं हो पाया है। इस कारण वह आगे नहीं बढ़ पाती हैं। महिलाओं को सभी क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलना चाहिए जिससे कि वह अच्छा काम कर सके। महिला फुटबाल टीम की खिलाड़ी सेक्टर-1 पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में बीपीएड की स्टूडेंट्स हैं।

उन्होंने अपनी मेहनत के अलावा अपनी पूरी तैयारी का श्रेय अपनी कोच पूजा नरवाल को दिया है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर महिला फुटबाल खिलाड़ी रितु रानी और उनकी कोच ने लोगों से अपील की है कि लोग नशे से दूर रहकर अपना ध्यान खेल की तरफ लगाएं। जिससे कि वह सही तरीके से तरक्की कर सके। सभी को इसके लिए आगे आना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें