सौ फीसदी दिव्यांग हैं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वैज्ञानिक बनकर नाम रोशन किया और छह आविष्कार करके देश को नई तकनीकें दीं। कहते हैं कोई भी सफलता आसानी से नहीं मिलती। उसके लिए कड़ी मेहनत, लगन व धैर्य के साथ आगे बढ़ना होता है। सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज पटेल को भी कई चुनौतियों से जूझना पड़ा, लेकिन वह कभी घबराए नहीं। अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुए और सफलता उनके कदम चूमती गई।
मात्र 33 साल की उम्र में उन्होंने न सिर्फ समाज बल्कि देश को कई ऐसी तकनीक दी हैं, जिसका फायदा आम आदमी और किसानों को मिल रहा है। डॉ. पटेल मूलरूप से यूपी के बांदा जिले के मियांबरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। गांव के सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने जमशेदपुर में एनआईटी से बीटेक की डिग्री हासिल की। उसके बाद सीएसआईआर के चंडीगढ़ सेंटर में उन्हें रिसर्च फेलोशिप करने का मौका मिला।
यहां पर भी उन्होंने बहुत ही बेहतरीन कार्य किए और साल 2012 में वैज्ञानिक के पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। तीन साल बाद वह सीनियर वैज्ञानिक के पद पर प्रमोट हो गए। हालांकि इतने कम समय में किसी की उन्नति संभव नहीं होती, लेकिन डॉ. पटेल को यह सौभाग्य सिर्फ मेहनत के बल पर मिला है। वह सौ फीसदी दिव्यांग हैं, लेकिन कभी भी वह इससे मायूस नहीं होते और न ही कभी इसे अपनी ढाल बनाया। साढ़े सात साल के सफर में वह अब तक देश को छह नई टेक्नोलॉजी दे चुके हैं। इसकी बदौलत कुछ स्टार्टअप खुले और रोजगार भी सृजित हुए।