इस बार स्टाफ ने उसके साथ तीन कर्मचारियों को बाथरूम में भेजा और यूरिन सैंपल लिया। सैंपल को जांच के लिए मशीन में लगाया। कुछ देर पश्चात रिपोर्ट भी आ गई। सैंपल रिपोर्ट में स्पष्ट था कि यह शख्स अफीम का आदी है। उसके यूरिन में मॉफिन व ड्रामाडोल की मात्रा निकली। स्टाफ ने अमृतपाल को फौरन दबोचा और पुलिस थाने भेजने की चेतावनी दी। इस पर वह माफी मांगने लगा।
स्टाफ ने कहा कि उसकी सैंपल रिपोर्ट डीसीपी कार्यालय भेजी जा रही है। साथ ही उसका असलाह लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी की जा रही है। सिविल अस्पताल में यह पहली घटना नहीं है। इसी वर्ष पंजाब पुलिस का एक कर्मचारी घर से अपनी पत्नी का यूरिन सैंपल लेकर आया था। अस्पताल प्रशासन ने गलत सैंपल देने वाले को पुलिस से पकड़वाया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ने दी थी ऐसी सलाह
पिछले वर्ष सिविल अस्पताल में ही कार्यरत एक कर्मचारी डोप टेस्ट की जाली रिपोर्ट तैयार करते पकड़ा गया था। मंगलवार की घटना में यह जानकारी मिली है कि स्वास्थ्य विभाग के ही किसी कर्मचारी ने अमृतपाल को सलाह दी थी कि वह यूरिन के बजाय पानी का सैंपल दे दे, ताकि उसकी रिपोर्ट निगेटिव आए। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. चरणजीत सिंह का कहना है कि लैब स्टाफ की सतर्कता से डोप टेस्ट पारदर्शी ढंग से किया जा रहा है। गलत सैंपल देने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करे।