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गीता जयंती: इतिहास रचने को तैयार गीतास्थली, राष्ट्रपति का आना कैंसिल

Tue, 06 Dec 2016 02:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
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गीता महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आज आगाज होगा। इतिहास रचने के लिए गीतास्थली पूरी तरह से तैयार है, वहीं राष्ट्रपति का आना कैंसिल हो गया। तमिलनाड़ू की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के चलते उनका कुरुक्षेत्र आने का कार्यक्रम टल गया। लेकिन ब्रह्मसरोवर पर महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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आसपास के क्षेत्र की साज-सज्जा करने में प्रशासन की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने करना था। उन्हें पुरुषोतमपुरा बाग में पवित्र ग्रंथ गीता के पूजन और गीता यज्ञ में आहुति डालकर इसकी शुरूआत करनी थी। कुरुक्षेत्र डीसी सुमेधा कटारिया ने इसकी पुष्टि की। वहीं, बीते दिन पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री रामबिलाश शर्मा ने सोमवार को गीता जयंती महोत्सव की तैयारियों का जायजा लिया।

उन्होंने सभी कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य प्रबंधों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सबसे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में देश के 574 जिलों से आए प्रतिनिधियों से मुलाकात कर एक ग्रुप फोटो कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके पश्चात ब्रहमसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग में ब्रहमसरोवर, गीता पूजन, गीता यज्ञ में आहुति डालने के बाद श्रीकृष्णा सर्किट प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे।
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उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ करने के बाद राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में अंतरराष्ट्रीय गीता सेमीनार का शुभारंभ करेंगे। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत श्रीकृष्णा सर्किट में ब्रहमसरोवर, सन्निहित सरोवर, ज्योतिसर, थानेसर शहर और नरकातारी तीर्थ पर्यटन स्थलों को दर्शनीय बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के तहत इन चारों तीर्थों को विकसित करने के लिए 97 करोड़ 35 लाख का बजट खर्च किया जाएगा।

 

किस राज्य से कितने प्रतिनिधि पहुंचे

ब्रह्मसरोवर पर गीता जयंती महोत्सव
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव आयोजन समिति के सदस्य एवं विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह ने बताया कि आंध्रप्रदेश से 6, अरुणाचल प्रदेश से 6, असम से 48, बिहार से 39, छत्तीसगढ़ से 22, गुजरात से 27, हरियाणा से 17, हिमाचल प्रदेश से 44, जम्मू एंड कश्मीर से 47, झारखंड से 29, कर्नाटक से 17, मध्य प्रदेश से 50, महाराष्ट्र से 33, मणीपुर से 5, उड़ीसा से 35, पंजाब से 23, राजस्थान से 20, सिक्किम से 2, तमिलनाडु से 14, त्रिपुरा से 7, उत्तराखंड से 11, उत्तर प्रदेश से 108, पश्चिम बंगाल से 24, दिल्ली से 6 व अन्य प्रदेशों व केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिनिधि पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिनिधि अपने-अपने प्रदेशों की वेशभूषा और अपने देश की माटी लेकर पहुंच रहे है। इस माटी से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनेंगी।
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ये है राज्यों के संयोजक

ब्रह्मसरोवर पर गीता जयंती
इन राज्यों के संयोजकों में असम, अरुणाचल, त्रिपुरा व मणीपुर से कर्ण गौड, बंगाल और सिक्किम से मंगल पांडे, उड़ीसा से रणजीत केएम स्वीन, छत्तीसगढ़ से जगदीश सिडार, झारखंड से दलीप महतो, बिहार से संतोष शोले, पूर्वी यूपी से राघवेन्द्रा सैनी, सेंट्रल यूपी से ओम प्रकाश, पश्चिमी यूपी से प्रहलाद प्रसाद, हिमाचल से संसार चंद, जम्मू कश्मीर और पंजाब से नीरज ठाकुर, राजस्थान और हरियाणा से दिनेश पवार, पश्चिमी मध्यप्रदेश से दलीप वाडिवा, पूर्वी मध्यप्रदेश से चंद्रभान सोनी, महाराष्ट्र और गुजरात से तुलसी राम, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से के राघवेन्द्र, कर्नाटका से अदृश्या, तमिलनाडू और केरल से कालीदाशन, हरियाणा से पुष्पा का नाम शामिल है।

उन्होंने बताया कि आंध्रप्रदेश से आरसी पुलाह, आरपी पुलाह, यू गोविंदाराजूलू, के राघवेन्द्र, वी लक्ष्मीनरसिम्हा केरमन, हेबातम इराना, अरुणाचल प्रदेश से मकपक पेयांग, हिलांग तेजाक, तबांग जमोह, अदिल तोको, तोको नाटुंग, तद्दर घागुम, असम से माटीराम चंद्र ब्रहमा, रुपम देका, बृज कुरमी, विद्युत राय, देबब्रता चौधरी, संसूरंग देमरी, दीपक चक्रव्रती, संभूनाथ बर्मन, संतीराम बस्थौला, परबीर केआर बरुहा, अजोय बैलुंग, अभिजीत नाथ, रणजीत केआर कलीता, बिश्वजीत दास, बाबुल नुनिया, दिओ कुमार बुरमी, मंटू शर्मा, अनिरुद्धा तालुकदार,  बिरेन्द्रा हेन्स, अजोय केआर नारजेरी, मणिक कलिता, नीलाकंटा पेगू, राजू यादव, बेदाब्रता शर्मा, मृनल शर्मा, राजीब दत्ता, रुप रेखा बरुहा, देवराज सपकोटा, मोन तोकबी, बॉबी साईका, सुकलाल प्रजा, ब्रिंची बोरा, निताई दास, निपती चकलद, कर्णा गौड, राधाकांत शाह, पुष्प कुमार लुमाउ, रुपाली हजारिका, केएच. गोपाल मितैयी सहित 600 से अधिक प्रतिनिधि पहुंचे हैं।
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