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चंडीगढ़ से इंटरनेशनल उड़ान का सपना देख रहे लोगों के लिए गुडन्यूज

Mon, 30 May 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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विमान में बम की सूचना
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चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इस साल जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति का विमान उतरने के साथ ही यह घोषणा हुई थी कि इस एयरपोर्ट से अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं होने के चलते यह मामला जनहित याचिका के रूप में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया।
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सोमवार को इस मामले में जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के चेयरमैन को तलब किया था। केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट के समक्ष रखी गई दलीलों पर सोमवार को फिर से केंद्र को कड़ी फटकार झेलनी पड़ी।

हाईकोर्ट ने केंद्र की ओर से 10 जून तक चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के आश्वासन के बाद इंडिगो एयरलाइंस को तीन हफ्ते में फ्लाइट शेड्यूल पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, सोमवार को कोर्ट में मौजूद एयरइंडिया की सब्सिडरी कंपनी एयरइंडिया एक्सप्रेस के अधिकारियों ने चंडीगढ़ से इस साल के अंत तक कम से कम दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का भरोसा दिलाया।
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सुनवाई के दौरान इंडिगो एयरलाइंस की ओर से कोर्ट को एक बार फिर यही कहा गया कि कंपनी चंडीगढ़ एयरपोर्ट से दुबई के लिए इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने को तैयार है बशर्ते कि कंपनी को इस बारे में कस्टम क्लीयरेंस व अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इस पर केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसीटर जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केंद्र 10 जून तक चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा देगा।

केंद्र के इस जवाब के बाद हाईकोर्ट ने इंडिगो को तीन सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने संबंधी पूरा शेड्यूल कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। इसके साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी चंडीगढ़ से दुबई व शारजाह के लिए कोम्बो फ्लाइट शुरू करने पर सहमति जता दी। कंपनी ने कोर्ट से कहा कि वह सर्दियों में अपना शेड्यूल हाईकोर्ट को सौंप देंगे।
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पंजाब-हरियाणा से ब्रिटिश कालोनी जैसा बर्ताव करता है केंद्र : हाईकोर्ट

highcourt
सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार के वकील ने इंटरनेशनल फ्लाइट नहीं उड़ने का सारा जिम्मा विमानन कंपनियों पर डालने की कोशिश की तो अब तक इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ काफी नाराज दिखाई दी। उन्होंने केंद्र से वकील को फटकारते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा के बारे में जब भी कोई बात होती है, केंद्र का रवैया इसी तरह का दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में सीएनजी का मामला हो या कोई अन्य, केंद्र सरकार इन दोनों राज्यों के साथ ब्रिटिश कालोनी जैसा व्यवहार करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से दोनों राज्यों से लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर सुविधाओं का है अभाव
सुनवाई के दौरान, जेट एयरवेज और अन्य एयरलाइंस के अधिकारियों की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट में सुविधाओं का अभाव है। इस एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल लैंडिंग सिस्टम (कैट-1) और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए कैट-3 होना बेहद जरूरी है क्योंकि इस इलाके में सर्दी के मौसम में धुंध के कारण विजिबिलिटी बेहद ही कम रहती है। इसके अलावा चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर अप्रोच लाइट सिस्टम (एएलएस) भी नहीं लगाया गया है। इस एयरपोर्ट पर रेस्क्यू और फायर फाइटिंग सेवाएं (आरएफएफ) भी श्रेणी-7 के उपलब्ध हैं, जबकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट में यह श्रेणी-8 व 9 के होने चाहिएं।

इंटरनेशनल उड़ान के लिए अभी छोटा है एयरपोर्ट : केंद्र
इस मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ जहां इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू नहीं होने के चलते एयरपोर्ट की जमीन किसानों को लौटाने का संकेत तक दे चुकी थी, तो सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि चंडीगढ़ में इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए अभी रनवे बढ़ाया जाना जरूरी है। केंद्र की ओर से रनवे की लंबाई कम होने की बात कहते हुए कई अन्य सुविधाओं के अभाव का उल्लेख भी किया गया।

जाहिर है, अचानक उठाए गए इस मुद्दे पर केंद्र को हाईकोर्ट की कड़ी फटकार भी झेलनी पड़ी। इस मौके पर मौजूद पंजाब के महाधिवक्ता ने एयरपोर्ट के लिए अब तक अधिग्रहीत जमीन का हवाला दिया, वहीं हरियाणा के महाधिवक्ता ने कहा कि हरियाणा सरकार इस एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू कराने के लिए हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
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