चंडीगढ़। चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच ने नकली नोटों के एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करके तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान हिमाचल प्रदेश मंडी के कटिपारी निवासी गौरव कुमार, पंजाब के संगरूर निवासी विक्रम मीणा उर्फ विक्की और राजस्थान के झालावाड़ निवासी जितेंद्र शर्मा के रूप में की गई है। पुलिस ने तीनों आरोपियों से कुल 24 लाख 27 हजार 700 रुपये के 7,157 नकली नोट, दो वाहन, प्रिंटर, स्याही की बोतलें, कटर और आरबीआई भारत सुरक्षा धागे वाला कागज जब्त किया है। इसमें से दो आरोपियों गौरव कुमार और विक्रम मीणा को 25 सितंबर को सेक्टर-22 के निजी स्कूल के पास से गिरफ्तार किया गया जबकि जितेंद्र शर्मा को आरोपियों की निशानदेही पर राजस्थान के झालावाड़ से एक अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया। जहां से उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसपी जसबीर सिंह, डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर सतविंदर दुहन ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में मामले की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने शेयर मार्केट में नुकसान और कर्ज के दबाव के बाद फर्जी नोटों का यह कारोबार शुरू किया। नोटों की खरीद के लिए असली पैसा दिया जाता था और इसके बाद यह आगे सप्लाई किया जाता था
गौरव कुमार (34) से 10 लाख 23 हजार रुपये कीमत के फर्जी 500 रुपये के 2,046 नकली नोट और टाटा हैरियर कार बरामद की गई। पुलिस के अनुसार गौरव ने 12वीं के बाद खेलों में करियर बनाने की कोशिश की पर सफल नहीं हुआ। फिर शेयर मार्केट में निवेश शुरू किया जिसमें नुकसान हो गया। उसकी मुलाकात महाराष्ट्र के प्रमोद कटरे और संगरूर के विक्रम मीणा से हुई। यह दोनों फर्जी नोटों (एफआईसीएन) के व्यापार में शामिल थे।
विक्रम मीणा उर्फ विक्की (35 ) से एक लाख 99 हजार रुपये कीमत के 500 और 100 रुपये के फर्जी 397 नोट और ऑल्टो कार बरामद हुई। 12वीं पास विक्रम मीणा भी शेयर मार्केट में निवेश के बाद नुकसान झेल चुका था। उसका संपर्क महाराष्ट्र के प्रमोद कटरे और गौरव और कोटा के जितेंद्र शर्मा से हुआ।
जितेंद्र शर्मा (42 ) के कब्जे से 12 लाख 5 हजार 700 रुपये के 500 और 100 रुपये के 4,709 नोट बरामद किए गए। जितेंद्र भी 12वीं पास है। जितेंद्र शर्मा पहले उज्जैन में मोबाइल दुकान और डिस्पोजेबल पेपर कप का कारोबार चलाया जिसमें उसको नुकसान हुआ। फिर उसने टैक्सी का काम किया पर बैंक से लिए गए भारी कर्ज की ईएमआई चुकाने का दबाव लगातार था। कर्ज के दबाव में फर्जी नोट प्रिंटिंग शुरू की।
गिरोह का तरीका
आरोपी पहले अपने नेटवर्क से नोट खरीदते और बेचते थे फिर फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए नए ग्राहकों को लुभाते थे। नकली नोट का लेन-देन आमतौर पर 1:3 के अनुपात में होता था। नोट कूरियर या हाथ से भेजे जाते थे। खरीदार नोट बेचकर मुनाफा कमाते या असली नोटों में मिलाकर चलाते थे।
पहले भी हो चुके गिरफ्तार, दो नाबालिग शामिल
गिरोह के सदस्य महाराष्ट्र के प्रमोद कत्रे और जम्मू-कश्मीर के मोहम्मद शफी गनाई भी पकड़ा गया था। प्रमोद को मध्य प्रदेश पुलिस और मोहम्मद शफी को जम्मू एंड कशमीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दो नाबालिग बच्चे भी गिरोह से जुड़े पाए गए।