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Chandigarh News: इंस्टाग्राम और गेमिंग ने बदली युवाओं की भाषा, झूठ बोला तो कहेंगे कैप

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चंडीगढ़। इंस्टाग्राम, गेमिंग, मीम्स और शॉर्ट वीडियो के दौर ने युवाओं की भाषा पूरी तरह बदल दी है। अब बातचीत में लंबे वाक्यों की जगह छोटे-छोटे स्लैंग और इंटरनेट के नए शब्दों का इस्तेमाल बढ़ गया है। यही वजह है कि कई बार माता-पिता अपने बच्चों की बातचीत या चैट का मतलब समझ ही नहीं पाते। अगर आपका बेटा कहे आज मैं पूरी तरह कुक्ड हूं या दोस्त की बात पर कैप बोल दे, तो इसका मतलब अलग-अलग डिजिटल स्लैंग से होता है, जिसे जेन जी आसानी से समझ लेती है।

कॉलेज विद्यार्थियों का कहना है कि यह भाषा बातचीत को तेज, आसान और मजेदार बनाती है। वहीं शिक्षकों और भाषाविदों का मानना है कि नई डिजिटल भाषा सीखना गलत नहीं है, लेकिन इसके साथ अपनी मातृभाषा और सामान्य संवाद शैली भी बनाए रखना जरूरी है।
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केस स्टडी-1: मम्मी ने समझा कैप मतलब टोपी
चंडीगढ़ की 19 वर्षीय छात्रा जानवी ने अपनी मां से कहा वह कैप कर रहा है। मां को लगा कि बात टोपी की हो रही है। बाद में बेटी ने बताया कि कैप का मतलब झूठ बोलना या बढ़ा-चढ़ाकर बात करना होता है, जबकि नो कैप का मतलब मैं सच कह रहा हूं होता है।


केस स्टडी-2: पापा बोले खाना बनाओ, बेटा बोला मैं कुक्ड हूं
एक छात्र अर्नव ने कॉलेज से लौटकर कहा आज मैं पूरी तरह कुक्ड हूं। पिता को लगा कि वह खाना बनाने की बात कर रहा है, जबकि बेटे का मतलब था कि वह बहुत ज्यादा थक चुका है और अब काम करने की हालत में नहीं है।


केस स्टडी-3: गोट को समझ बैठे बकरी
एक स्कूल छात्र विकास ने क्रिकेटर की तारीफ करते हुए कहा वह तो गोट है। दादा-दादी को लगा कि वह बकरी की बात कर रहा है। बाद में पता चला कि गोट का मतलब ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम यानी अपने क्षेत्र का सबसे बेहतरीन व्यक्ति होता है।

कई अजीबोगरीब शब्द कर रहे इस्तेमाल
आज की युवा पीढ़ी के बीच स्ले, रिज्ज, औरा, सिगमा, एनपीसी, सस, मिड, वाइब, बेट, ब्रूह, डेलूलू, लॉ की, हाई की, टच ग्रास और इट्स ग्रीविंग.. जैसे शब्द आम हो चुके हैं। सोशल मीडिया और गेमिंग की वजह से ये शब्द रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गए हैं।
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समय के साथ रहता है बदलाव
पीयू के भाषाविद् डॉ. अशोक कुमार कि भाषा समय के साथ बदलती रहती है और हर पीढ़ी अपनी नई अभिव्यक्ति विकसित करती है। हालांकि, डिजिटल स्लैंग के साथ-साथ सही हिंदी, पंजाबी या अपनी मातृभाषा में संवाद करने की आदत भी बनाए रखना जरूरी है। युवा रोजगार न होने के कारण परेशान हैं। इसलिए वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। कोई इस बदलाव को नहीं रोक सकता।
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