चंडीगढ़। मासूमों को नया जीवन देने वाला ‘पालना’ अब जल्द ही शहर के अस्पतालों में भी दिखाई देगा। जिला बाल संरक्षण इकाई की योजना पर इंजीनियरिंग विभाग ने काम करना शुरू कर दिया है। डीसी मनदीप सिंह बराड़ की पहल पर जिला बाल संरक्षण इकाई ने पालना योजना की शुरुआत की है। पालने के जरिए अनचाहे मासूमों के जीवन को अब बचाया जा सकेगा।
आपको बता दें कि पिछले पांच साल में चंडीगढ़ में 82 ऐसे मासूम मिले हैं, जिनको उनके मां-बाप सड़क या अन्य लावारिस स्थानों पर छोड़ गए थे। ऐसे में इन लावारिस मासूमों की जान बचाने और उन्हें एक बेहतर जिंदगी देने के लिए डीसी मनदीप सिंह बराड़ की पहल पर जिला बाल संरक्षण इकाई चंडीगढ़ ने पालना योजना शुरू की है। इस योजना की स्वीकृति मिलने के बाद इकाई के द्वारा इंजीनियरिंग विभाग को पालना बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इंजीनियरिंग विभाग ने भी अस्पतालों में सुरक्षित स्थान चिह्नित करने के साथ ही पालना बनाने का काम शुरू कर दिया है। अब जल्द ही शहर के अस्पतालों में एक-एक पालना लगाया जाएगा। डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने पालने में मिलने वाले मासूमों की देखरेख के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई की जिम्मेदारी तय की है।
वर्ष लावारिस मासूमों की संख्या
2015 28
2016 15
2017 11
2018 16
2019 12
2020 00
पालना योजना मासूमों के जीवन को बचाने के लिए शुरू की जा रही है। इंजीनियरिंग विभाग को पालना बनाने और अस्पतालों में स्थान चिह्नित करने का कार्य किया जा रहा है।
- तबस्सुम खान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, चंडीगढ़