नाटक का मुख्य किरदार इन्ना है। इसे फौजी हमले के बाद गुलाम बना लिया गया। इन्ना ने गुलामी के जीवन को दिल और दिमाग से अपना लिया था। वह बादशाह या उसके सलाहकारों के हर आदेश की पूरी ईमानदारी से पालन करता था। वह काम के दौरान या खाली समय में लोक धुनों पर लोगों के गीत गाता रहता था। इस कारण उसे हर लोग उसे दिल से प्यार करता है। उस राज्य का बादशाह नए महल का निर्माण करवाता है। यह महल 20 वर्षों मेंं तैयार होता है। बादशाह का नाम दरवाजे पर लिखने के समय चमत्कार होता है। हर बार बादशाह का नाम मिट जाता है। उसके जगह पर इन्ना का चमक उठता था। इस रहस्यमयी घटनाक्रम का असल राज इन्ना के प्रति लोगों का प्यार है। बादशाह उसे सख्त सजा देना चाहता है लेकिन आसपास के लोग उसे दिल और दिमाग से वार करने के लिए वजीर-ए-आजम बनाए जाने का सलाह देते हैं।
बादशाह की बेगम इन्ना को हुकूमत के लोगों के प्रति प्यार का वास्ता देकर जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार करती है। इस प्रस्तुति में इन्ना की भूमिका में अरमान संधू ने किया है। उन्होंने एक गुलाम से वजीर-ए-आजम तक की मनोदशा को बेहतरीन तरीके से अदा किया। उनके भोलेपन को बरगला दिए जाने की भूमिका सुमनदीप बड़ैच ने अदा की, जो हुकुमती अहंकार में नम्रता का रंग घोल रही थी। बादशाह की भूमिका में गुरप्रीत सिंह बड़ैच की दमदार आवाज ने दर्शकों प्रभावित किया। बादशाह के दरबार की शाही नर्तक की भूमिका अनुहार कौर ने निभाया, जो हुकुमत की सेवा के लिए नए बने वजीर-ए-आजम को भरमा भी रही थी और एक गुलाम को भविष्य में आपने वाली दुखांत का एहसास भी करवा रही थी लेकिन इन्ना उस समय तक पूरी तरह से हुकुमत के रंग में रंग गया था। इन्ना के दोस्त बने गुलाम फसी की भूमिका भरत शर्मा ने निभाई। पहले वाले वजीर-ए-आजम की भूमिका गुरमुख सिंह गिन्नी ने अदा की। इस दौरान गुरजंट सिंह, मनदीप जोशी, अवतार ऐरी, युवराज बाजवा, सोनिया, बबीता और परमवीर ने निभाई। नेपथ्य में गीत शब्दीश पेश कर रहे थे। सेट लक्खा लहरी ने डिजाइन की। लाइटिंग करन गुलजार ने की।