अभय ने पत्र में कहा कि हरियाणा में सिरसा, फतेहाबाद, करनाल, यमुनानगर आदि जिलों में नशा पुलिस के नाक की नीचे कैसे बेचा जा रहा है, यह जांच का विषय है। उनके अनुसार अब युवा वर्ग प्राकृतिक नशे से सिंथेटिक नशे को अपना रहे हैं। पुलिस को नशा करने वालों के युवाओं को पकड़ने से पहले नशा तस्करी करने वालों को पकड़ना चाहिए और इस बात की तह में जाना चाहिए कि यह नशे की खेप कहां से और किससे प्राप्त होती है। यह भी सच्चाई है कि सरकार और पुलिस की मिलीभगत के बगैर नशे का व्यापार होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
पिछले दिनों नाइजीरियन नागरिक नशे का व्यापार करते पुलिस के हाथ लगे और इसी तरह दिल्ली के साथ लगते गुरूग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ आदि शहरों में विदेशी नागरिक अपना नशे का व्यापार बेखौफ कर रहे हैं। यह धीमा जहर युवाओं की नसो में फैलता जा रहा है। मेरी सूचना के अनुसार पुलिस वाले भी नशे के माल खाने से स्मैक, गांजा आदि बेच कर अपने हाथ रंग रहे हैं।