टिकट न मिलने पर कांग्रेस छोड़ने वाले कुरड़ाराम को इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने गुरुवार को दोपहर 12:54 बजे कुरड़ाराम को इनेलो में शामिल किया। एक बजकर छह मिनट पर उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया। महज 12 मिनट में कुरड़ाराम इनेलो प्रत्याशी बन गए। इनेलो में शामिल होने से डेढ़ घंटे पहले ही कुरड़ाराम ने कांग्रेस को अलविदा कहा था।
इनेलो कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए अभय सिंह चौटाला ने कहा कि आदमपुर उपचुनाव की टिकट के लिए तीन नाम आए थे। अधिकतर कार्यकर्ता चाहते थे कि चौटाला परिवार से कोई चुनाव लड़े। दूसरे नंबर पर कार्यकर्ता राजेश गोदारा को चुनावी मैदान में उतारना चाहते थे। तीसरा नाम कुरड़ाराम का आया था।
लोगों को पता था कि कांग्रेस कुरड़ाराम से धोखा करेगी। इस कारण लोग कुरड़ाराम को टिकट की मांग कर रहे थे। आखिरी छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों की समस्याओं को हल कराने में कुरड़ाराम ने काफी संघर्ष किया है। इस कारण इनेलो ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। अभय सिंह ने बताया कि 14 अक्तूबर को चौधरी ओमप्रकाश चौटाला इनेलो प्रत्याशी कुरड़ाराम का नामांकन कराएंगे।
बागड़ी और गादड़ी के लिए डंडे ठा ल्यो
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कांग्रेस कुरड़ाराम, रामनिवास घोड़ेला या किसी स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देती तो वह पक्का जीत जाता। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीजेपी के साथ अपनी सेटिंग के चलते बाहरी प्रत्याशी जयप्रकाश को टिकट दी। जयप्रकाश ने कलायत में कहा था बागड़ी और गादड़ी के लिए डंडे ठा ल्यो। लोग अपने अपमान को कैसे भूल जाएंगे।
कौन हैं कुरड़ाराम
कुरड़ाराम ने हविपा से वर्ष 2000 में आदमपुर चुनाव लड़ा था। उन्हें कुल वोट का पौने चार प्रतिशत यानी 3416 वोट मिले थे। हविपा के कांग्रेस में विलय होने के बाद कुरड़ाराम कांग्रेस में आ गए थे। लोहारु व तोशाम विधानसभा के पर्यवेक्षक और वर्ष 2007 से 2014 तक कांग्रेस में प्रदेश संगठन सचिव रह चुके हैं। जल संघर्ष समिति के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को नहरी पानी दिलाने की लड़ाई लड़ी। मुआवजे की लड़ाई में भी किसानों की अगुवाई करते रहे हैं।
कांग्रेस पर बरसे कुरड़ाराम
कुरड़ाराम ने कहा कि कांग्रेस अब बाप-बेटे की पार्टी बन कर रह गई है। जयप्रकाश ने आदमपुर से 2009 में चुनाव लड़ा। जनता ने उन्हें 42 हजार वोट दिए लेकिन उनके बाद वह कभी यहां नहीं आए। टिकट के लिए मैंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ 30 मिनट बात की और दीपेंद्र को भी कहा कि आप गलत फैसला ले रहे हैं। मुझे चाहे टिकट न दें, परंतु किसी स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ता को टिकट दें, वे नहीं माने। भूपेंद्र हुड्डा ने ईडी के भय से जेपी को टिकट दी।