सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि सूबे में इंडस्ट्री को पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देने का फैसला वापस नहीं लिया गया है। कुछ कारणों से नोटिफिकेशन में देरी हुई है। लुधियाना की इंडस्ट्री ने एक दिन पहले नोटिफिकेशन जारी न होने को लेकर सरकार को घेरा था। इसके बाद सीएम ने साफ किया कि नोटिफिकेशन में कुछ देरी हुई है। क्योंकि नई दरों केलागू होने से इंडस्ट्री को पेश आने वाले कुछ अहम मुद्दे हल करने को उद्योग विभाग को समय दिया गया है।
पंजाब राज्य बिजली रेगुलेटरी कमीशन ने बिजली दरों की दो हिस्सों में रूपरेखा का एलान किया था। जोकि सब्सिडी का लाभ थोक में औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचने को रोकता है। इसमें स्टील उद्योग और सह-उत्पाद सामर्थ्य वाली इकाइयां शामिल है। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने उनसे मिल कर निर्धारित दरों केउलट प्रभाव को कम से कम करने के लिए दखल देने की मांग की थी। सीएम ने बताया कि सह-उत्पाद पर निर्भर बड़ी इकाइयों को बड़े स्तर बाहरी बिजली सामर्थ्य स्थापित करने को मजबूर होना पड़ेगा। उनको इसकेलिए निर्धारित दरों का भुगतान अपेक्षित होगा, जबकि ग्रिड से उनका बिजली का प्रयोग बहुत कम है।
स्टील उद्योग को भी अपनी मशीनों के कोल्ड स्टार्ट के लिए बड़ी बिजली सामर्थ्य की जरूरत है, जबकि इनका थोक प्रयोग बहुत कम है। सीएम ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव-बिजली चेयरमैन पीएसपीसीएल और उद्योग सचिव को उद्योग प्रतिनिधियों से चर्चा कर इसकेहल के निर्देश दिए हैं। वे अपनी सिफारिशें एक माह में रेगुलेटर को सौंपेंगे, ताकि सारी इंडस्ट्री की बिजली सब्सिडी दी जा सके।